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राहुल गांधी ने अपने दूसरे चुनावी मैदान के रूप में केरल के वायनाड को क्यों चुना ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2019, 13:09 IST

कांग्रेस द्वारा घोषित उम्मीदवारों की पहली सूची में अमेठी से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम था. लेकिन कुछ दिनों बाद कांग्रेस ने फैसला किया कि राहुल गांधी अमेठी के अलावा एक और सीट से चुनाव लड़ेंगे. पार्टी ने फैसला किया है कि राहुल गांधी की दूसरी सीट केरल में वायनाड होगी. कांग्रेस का मानना है कि वायनाड जिला, जो 2018 की विनाशकारी बाढ़ में सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, अगर कांग्रेस अध्यक्ष सीट से चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें इसका फायदा होगा.

न्यूज़ वेबसाइट न्यूज़ मिनट ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि एनसीपी और वामपंथियों ने इसका कड़ा विरोध किया है. केरल के सीएम पिनाराई विजयन सहित कई वाम नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि राहुल गांधी के वामपंथी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ने से संकेत मिलेगा कि धर्मनिरपेक्ष मोर्चा एक साथ नहीं है. वायनाड से एलडीएफ के उम्मीदवार सीपीआई के पीपी सुनेर हैं.

वायनाड लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का परिसीमन अभ्यास के बाद 2008 में किया गया था. इसमें सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. जिसमे वायनाड और मलप्पुरम जिले से तीन-तीन शामिल हैं. जबकि कोझीकोड जिले से एक है. 2009 और 2014 में कांग्रेस के एमआई शनवास ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) को हराकर सीट जीती. नवंबर 2018 में शनवास की मृत्यु के बाद से यह सीट खाली है. हालांकि शनवास की जीत का अंतर 2009 से 2014 में काफी कम हो गया था, लेकिन कांग्रेस अब भी मानती है कि यह उनके नेता के लिए एक सुरक्षित सीट है.

इसका कारण यह है कि इस निर्वाचन क्षेत्र के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में विशेष रूप से मानंतवाडी, सुल्तानबाथरी, और कलपेट्टा में मुसलमानों की बड़ी आबादी है. वायनाड जिले में लगभग 49 फीसदी हिंदू और 49 फीसदी मुस्लिम और ईसाई हैं. 2009 के लोकसभा चुनावों के लिए वायनाड में कुल मतदाताओं की संख्या 11,02,097 थी. शनवास को 410,703 वोट मिले, जो कि 49.86 फीसदी वोट थे. उन्होंने सीपीआई के एम रहमतुल्लम को हराया, जिन्हें 257,264 (31.23%) मिले.

 

2009 की तुलना में शनावास को 2014 में सीट जीतने में मुश्किल पैदा हुई. हालांकि, उस चुनाव में भाजपा ने अपने उम्मीदवार पीआर रस्मिलनाथ को 80,752 वोट (6.46%) मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे. भाजपा को मिले ये वोट 2009 से 3.85% ज्यादा थे. कांग्रेस को भरोसा है कि राहुल गांधी की स्टार वैल्यू वोटों में आ जाएगी और उन्हें एक आसान जीत मिलेगी.

अमेठी के हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र में राहुल गांधी का मुकाबला एक बार फिर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से होगा. 2014 के चुनावों में राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को एक लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया था. कांग्रेस का वोट शेयर 2014 में 46% तक कम हो गया था, जबकि इसके पहले के शेयरों में क्रमशः 2009 और 2004 के चुनावों में 71% और 66% था. अमेठी में भाजपा का वोट शेयर 2004 में एकल अंकों में रहा, 2014 में उसे 37% वोट मिले.

यह सीट लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ रही है, जो 1998 के बाद से पिछले तीन दशकों में यहां नहीं हारी. जब भाजपा के संजय सिंह ने कांग्रेस के सतीश शर्मा को 23,270 मतों के अंतर से हराया था. हालांकि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए चिंता का कारण बन गए. भाजपा अमेठी लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से चार जीतने में कामयाब रही.

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First published: 31 March 2019, 13:09 IST
 
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