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भोपाल जेल से फरार हुए सिमी के 8 कार्यकर्ता एनकाउंटर में मारे गए

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 October 2016, 12:15 IST
(पत्रिका)

भोपाल सेंट्रल जेल से रविवार रात फरार हुए सिमी के आठ आतंकियों को मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया है. इससे पहले सिमी के आतंकी जेल में एक सुरक्षाकर्मी की हत्या करके फरार हो गए थे. इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया था.

भोपाल पुलिस का कहना है कि जेल से फरार हुए आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसके बाद भोपाल शहर के बाहरी इलाके में ईंटखेड़ी गांव के पास मुठभेड़ के दौरान सिमी के आठों सदस्यों को मार गिराया गया.

भोपाल के बाहरी इलाके में एनकाउंटर

इस मामले में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सोमवार सुबह बात की थी. साथ ही राज्य सरकार ने जेल सुपरिंटेंडेंट समेत चार जेल अफसरों को सस्पेंड किया है.

गृह मंत्रालय ने पूरे मामले पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी थी. बताया जा रहा है कि सिमी के जो सदस्य मुठभेड़ में मारे गए हैं, उनमें से कुछ खांडवा जेल से पहले भी फरार हो चुके थे.

आईजी बोले- पुलिस पर गोलियां चलाई

भोपाल के आईजी योगेश चौधरी ने एनकाउंटर के बारे में मीडिया को जानकारी दी. चौधरी ने कहा, "हमने जेल से फरार हुए आठों कैदियों की लोकेशन मिलने के बाद उन्हें घेर लिया. उन्होंने हमारे ऊपर गोलियां चलाईं. क्रॉस फायरिंग में सभी आठों लोग मारे गए."

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सिमी के आतंकियों ने जेल के बी ब्लॉक के बीच की दीवार फांदी और जेल की मुख्य दीवार तक पहुंचे, जो 35 फीट ऊंची है. इस दीवार पर चढ़कर इकट्ठा की गई चादरों की रस्सी को नीचे डालकर वे उतर गए.

इस दीवार के पार एक और दीवार थी जिसपर कंटीले तार लगे हुए थे. इस दीवार में एक दरवाजा था, जिसका ताला वे खोल नहीं पाए. इसके बाद दीवार तोड़ने की कोशिश में ईंटें ही बाहर निकल आईं और सभी जेल से निकलने में कामयाब रहे.

हेड कांस्टेबल की हत्या के बाद फरार

बताया जा रहा है कि भोपाल सेंट्रल जेल के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले बी ब्लॉक में बंद सिमी के आठ आतंकियों ने पहले बैरक तोड़ा और उसके बाद हेड कांस्टेबल रमाशंकर की हत्या की. इसके बाद सभी कैदी जेल से चादर की मदद से दीवार फांदकर फरार हो गए.

फरार हुए आतंकियों के नाम शेख मुजीब, माजिद खालिद, अकील खिलजी, जाकिर, सलीख महबूब और अमजद शामिल हैं. इंदौर से गृह मंत्रालय को एक खुफिया रिपोर्ट भी मिली थी, जिसमें जेल तोड़कर फरारी की आशंका जताई गई थी. माना जा रहा है कि इस खुफिया रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया गया.  

चादर की मदद से फांदी दीवार

भोपाल के डीआईजी रमन सिंह ने बताया, "सिमी के आठ आतंकी तड़के दो से तीन बजे के बीच एक सुरक्षागार्ड की हत्या करने के बाद जेल से फरार हो गए. स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के आतंकियों ने एक सुरक्षागार्ड की हत्या की. इसके बाद वे चादरों की मदद से जेल की दीवार लांघकर फरार हो गए."

डीआईजी के मुताबिक पहले आतंकियों ने गार्ड को घेरकर अपने कब्जे में लिया और फिर स्टील की प्लेट से उसका गला काटकर हत्या कर दी.

गौरतलब है कि बीते कुछ साल में उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश की पुलिस ने सिमी के तमाम बड़े आतंकियों को पकड़ा है, लेकिन सिमी चीफ सफदर नागौरी समेत करीब 70 सिमी मॉड्यूल अभी भी लापता हैं. जिनके बारे में खुफिया विभाग के पास अब तक कोई जानकारी नहीं है. 

फाइल फोटो

भोपाल जेल में थे 30 सिमी आतंकी

मुठभेड़ में मारे गए सिमी के इन आतंकियों पर देशद्रोह के मामले चल रहे थे. ये सभी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के रहने वाले थे.

भोपाल की सेंट्रल जेल में सिमी के तकरीबन 30 आतंकवादी अलग-अलग सेल में बंद हैं. फरार 8 आतंकवादी जेल के बी ब्लॉक में कैद थे. बताया जा रहा है कि उन्होंने भागने की साजिश पहले ही बना रखी थी.

इसके लिए ढेर सारी चादरें इकट्ठा करके पहले से रखी थीं. दिवाली की रात में ड्यूटी बदलते वक्त करीब 2.30 बजे इन्होंने दो आरक्षियों पर हमला किया. जिनमें से एक रमाशंकर यादव की गला रेतकर हत्या कर दी, जबकि दूसरे सुरक्षा कर्मी को बांध दिया.

एएनआई

क्या है सिमी?

सिमी का पूरा नाम स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया है. सिमी का गठन 1977 में हुआ था. इसका गठन 25 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ. डॉक्टर मोहम्मद अब्दुल्लाह सिद्दीकी इसके संस्थापक अध्यक्ष थे.

हालांकि सिद्दीकी कहते हैं कि उनके समय में सिमी का स्वरूप बिल्कुल अलग था. केंद्र सरकार ने 2001 में पोटा (आतंकवाद निरोधक कानून) के तहत सिमी पर प्रतिबंध लगा दिया. इस प्रतिबंध के बाद देशभर में सिमी के सबसे ज्यादा कायकर्ताओं की गिरफ्तारी मध्य प्रदेश से हुई.

खास बात यह है कि मध्य प्रदेश में जेल से आतंकियों के फरार होने की यह पहली घटना नहीं है. इनमें से कुछ आतंकी 2013 में भी खंडवा की जेल तोड़कर फरार हुए थे. जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि कुछ एनकाउंटर में मारे गए थे.

First published: 31 October 2016, 12:15 IST
 
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