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बालाघाट कांड: एसआईटी की तफ़्तीश से संघ में घबराहट

शैलेंद्र तिवारी | Updated on: 23 October 2016, 7:09 IST
QUICK PILL
  • जैसे-जैसे जांच एजेंसी एसआईटी की तफ़्तीश आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे संघ की घबराहट में इज़ाफ़ा होता जा रहा है. 
  • संघ ने जांच एजेंसी की तफ़्तीश के नाते ही नई रणनीति के तहत भोपाल में एक प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. 

बालाघाट कांड में अब संघ ने मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. पहली बार संघ ने पूछा है कि आरोपी पुलिसकर्मियों की अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है? संघ के इस सवाल को जांच एजेंसी एसआईटी पर दबाव बनाने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है. 

हालांकि 25 सितंबर की रात बालाघाट ज़िले के बैहर थाने में संघ प्रचारक सुरेश यादव के साथ हुई मारपीट के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर तरह-तरह की कार्रवाई हो चुकी है. बैहर थाने के कई स्टाफ से लेकर टीआई और एएसपी निलंबित किए जा चुके हैं. एसपी और आईजी का तबादला हो जा चुका है. पुलिसकर्मियों पर पांच से ज्यादा मुकदमें दर्ज कर लिए गए हैं. बावजूद इसके, संघ संतुष्ट नहीं है. 

पहली बार संघ के क्षेत्र संपर्क प्रमुख राजकुमार मटाले और सह प्रांत संघचालक अशोक पांडे सामने आए. इन्होंने भोपाल में प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार से पूछा कि आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई? 

हालांकि जब पत्रकारों ने संघ से पूछा कि घटना 25 सितंबर की रात की है लेकिन सुरेश यादव को दो दिन बाद जबलपुर के एक निजी नर्सिंग होम में 27 सितंबर को भर्ती कराया जाता है. उन्हें जबलपुर मेडिकल कॉलेज में क्यों नहीं ले जाया गया? एक सवाल यह भी था कि जबलपुर के जिस अस्पताल में सुरेश यादव भर्ती हैं, उसके संचालक संघ से जुड़े हुए हैं. आखिर सुरेश यादव को संघ से जुड़े डॉक्टर के यहां पर ही भर्ती कराने की जरूरत क्यों पड़ी? 

एसआईटी की तफ़्तीश कहां पहुंची?

एसआईटी अपनी जांच डीआईजी छतरपुर की निगरानी में कर रही है. फिलहाल एजेंसी इस तफ्तीश में जुटी है कि कहीं  पुलिसकर्मियों पर संघ के दबाव में फर्ज़ी मुकदमें तो नहीं कर दिए गए हैं. सूत्रों का दावा है कि एसआईटी की जांच में पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों में तथ्य कमजोर नजर आ रहे हैं.  

दबाव की रणनीति

माना जा रहा है कि इसी वजह से संघ ने इतने दिनों बाद सामने आकर प्रेस कांफ्रेंस की है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके. वहीं मध्यप्रदेश सरकार ने इस दबाव को नाजायज करार देते हुए घटना का पूरा ब्यौरा नागपुर में सौंप दिया है. 

संघ इस वजह से भी दबाव में है क्योंकि एक हालिया वीडियो में 25 की घटना के बाद सुरेश यादव को मेडिकल के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है जिसमें वह पूरी तरह दुरुस्त दिख रहा है. मगर मज़े की बात यह है कि जबलपुर में संघ से जुड़े एक डॉक्टर के नर्सिंग होम में भर्ती होने के बाद वह डिस्चार्ज नहीं हुए हैं. 

बहरहाल, इस केस पर नज़र रखने वाला हर शख़्स जानता है कि बालाघाट कांड राजनीतिक दबाव की राजनीति भर है. एसआईटी की तफ़्तीश संघ प्रचारक के खिलाफ जा रही है. ऐसे में संघ खुद घबराया हुआ है कि जांच के नतीजे उसे एक्सपोज़ कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, तभी संघ ने नई रणनीति के तहत सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया है. 

First published: 23 October 2016, 7:09 IST
 
शैलेंद्र तिवारी @catchhindi

लेखक पत्रिका मध्यप्रदेश के स्टेट ब्यूरो चीफ हैं.

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