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'शिवराज जी जस्टिस काटजू को सिमी एनकाउंटर की न्यायिक जांच सौंपने का साहस दिखाएंगे?'

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 November 2016, 12:53 IST
(कैच)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आठ सिमी कार्यकर्ताओं के कथित एनकाउंटर पर मचा सियासी घमासान तेज होता जा रहा है. एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एनकाउंटर और भोपाल जेलब्रेक की न्यायिक जांच कराने का आदेश दिया है.

इस पर कांग्रेस महासचिव और राज्य के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बगैर देरी किए प्रतिक्रिया दी है. दिग्विजय ने अपने आधिकारिक ट्विटर पर सवाल पूछा, "शिवराज चौहान जी जस्टिस मार्कण्डेय काटजू को भोपाल जेल ब्रेक और एनकाउंटर की न्यायिक जांच सौंपने का साहस दिखाएंगे?"

सीएम ने दिया है न्यायिक जांच का आदेश

दिग्विजय ने अपने अगले ट्वीट में भी भोपाल एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कैच न्यूज़ का एक लेख पोस्ट किया है. इसका शीर्षक है, "सिमी एनकाउंटर करने वाले पुलिस कर्मियों का सम्मान, क्या यह बटला हाउस की पुनरावृत्ति है?"

मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सिमी के आठ कार्यकर्ताओं का एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों को भोपाल में दो नवंबर को सम्मानित किया था. शिवराज ने मुठभेड़ में शामिल हर पुलिसकर्मी को दो-दो लाख का इनाम घोषित किया. बताया जा रहा है कि ईंटखेड़ी में पुलिस को संदिग्धों के होने की सूचना देने वाले ग्रामीणों को भी 40 लाख का इनाम देने का एलान हुआ है.

जस्टिस काटजू ने फिर की फांसी की मांग

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अब भोपाल एनकाउंटर की न्यायिक जांच का आदेश दिया है. कैच ने गुरुवार को एक एक्सक्लूसिव ऑडियो भी जारी किया था, जिसके बाद से इस मुठभेड़ की विश्वसनीयता फिर सवालों के घेरे में है.

हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एसके पांडे की अध्यक्षता में भोपाल जेलब्रेक और सिमी के आठ कार्यकर्ताओं के कथित एनकाउंटर की न्यायिक जांच होगी. इससे पहले शिवराज ने कहा था कि मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराई जाएगी.  

इस बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू अपनी बात पर कायम है. देर रात अपने फेसबुक पोस्ट में उन्होंने भोपाल एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए इसका आदेश देने वालों को फांसी की मांग दोहराई.

काटजू ने फेसबुक पर लिखा, "इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि भोपाल एनकाउंटर फर्जी था. इसको साबित करने के अपरिहार्य सबूत मौजूद हैं. केवल इस बात की जांच होनी चाहिए कि किसने मुठभेड़ का आदेश दिया और किसने इसको अंजाम तक पहुंचाया."

जस्टिस काटजू ने आगे लिखा, "उन सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होनी चाहिए और अगर वे अदालत से दोषी करार दिए जाते हैं तो सजा-ए-मौत हो, जैसा कि प्रकाश कदम बनाम रामप्रसाद विश्वनाथ गुप्त मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था."

फेसबुक
First published: 4 November 2016, 12:53 IST
 
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