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इस शख्स ने 100 रुपए के सिम से अमेज़न को लगाया लाखों का चूना

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 February 2018, 11:41 IST
आधार लिंक हुई सिम को 100 रुपए में हासिल कर दो युवक फर्जी पेमेंट वॉलेट बना ई-कॉमर्स कंपनियों को चपत लगा रहे थे. सामान मिलने पर बॉक्स खाली मिलने की शिकायत कर उसका रिफंड वे ले लेते थे. वहीं, सामान को कम कीमत पर ऑनलाइन कंपनी ओएलएक्स पर बेच देते थे. अपनी पहचान छिपाने के लिए आरोपित सॉफ्टवेयर की मदद से मोबाइल की आईएमईआई नंबर व कम्प्यूटर का आईपी एड्रेस भी छिपा लेते थे.

 
 

 

एसपी राज्य साइबर सेल जितेंद्र सिंह ने बताया, प्रिंस कुमार सिंह (१९) निवासी चिकित्सक नगर व विकास ङ्क्षसह परिहार (२२) निवासी जवाहर नगर को पकड़ा गया है. इनके पास से कम्प्यूटर पाट्र्स, महंगे कपड़े बरामद हुए हैं. कुछ दिनों पहले साइबर सेल ने सोहेल पटेल को पकड़ा था. उसने बताया था कि इंदौर में कुछ युवक राजस्थान व उड़ीसा से फर्जी सिम मंगवाकर उसका इस्तेमाल साइबर अपराध के लिए कर रहे हैं. इसकेबाद साइबर सेल के टीआई राशिद अहमद, एसआई आशुतोष मिठास की टीम जांच में जुटी. इसमें दोनों आरोपित पकडे़ गए. आरोपित फर्जी सिम के जरिए ई-वॉलेट पर कई खाते बना लेते थे.

इसके बाद फर्जीवाड़ा करते थे. आरोपित के पास कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर भी हैं, जिनसे वे साइबर ठगी के दौरान अपने मोबाइल का आईएमईआई नंबर व कम्प्यूटर का आईपी एड्रेस छिपा लेते थे. ऐसे में किस मोबाइल व कम्प्यूटर से ई-वॉलेट बना व ऑर्डर किया गया, इसका पता करना मुश्किल होता है. दोनों आरोपित को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पुलिस टीम में आमोद सिंह राठौर, अंबाराम बारूड़, धीरज सिंह गौर, राकेश बामनिया, आशीष शुक्ला, विवेक सिंह, राहुल सिंह गौर, गजेंद्र सिंह राठौर शामिल थे.

 

बैड डिलीवरी के जरिये करते थे धोखा

बैड डिलीवरी के जरिए करते थे खेल दोनों आरोपित फर्जी सिम से बने ई-वॉलेट खाते से पांच हजार रुपए से कम कीमत का सामान बुक करते थे. जब डिलेवरी देने कोरियर कंपनी का कर्मचारी आता तो घर के बजाय रास्ते में कहीं बुलाकर डिलेवरी लेते और रुपए दे देते.

कुछ कंपनियों की पॉलिसी है कि पांच हजार रुपए से कम कीमत के सामान होने पर ग्राहक अगर बैड डिलीवरी या प्रोडक्ट खराब होने की शिकायत करता है तो कंपनी तुरंत ही उसके वॉलेट में पैसा रिफंड कर देती है. वह इसके लिए किसी तरह की जांच नहीं करती. आरोपित इसी पॉलिसी का फायदा उठाते थे. विकास जो सामान मंगवाता, उसका खुद इस्तेमाल करता था और प्रिंस इन सामान को कम कीमत पर ओएलएक्स पर बेच देता था.

First published: 16 February 2018, 11:27 IST
 
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