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देश के पहले गौ अभयारण्य में ही गायों की एंट्री पर लग गई रोक, फंड की भारी कमी

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 July 2018, 11:20 IST

मध्य प्रदेश में स्थित देश का पहला जो अभ्यारण्य धन और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है. कामधेनु गौ अभ्यारण्य की शुरुआत पिछले साल सितंबर महीने में की गई थी. पांच महीने बाद यानी फ़रवरी से इसमें गायों को लाए जाने पर रोक लगा दी गई. राज्य के अग्र जिले के सालरिया गांव में 472 हेक्टेयर से अधिक में फैले इस अभयारण्य सितंबर 2017 में खोला गया था.

उस वक्त कहा गया था कि खुले में भटकने वाली और लोगों द्वारा त्याग दिए जाने वाली गायों को यहां आश्रय देने के अलावा, यह गाय गोबर और गाय मूत्र के के जरिये प्राप्त कीटनाशकों और दवाओं को बढ़ावा देने देगा. योजना के तहत इसमें 24 शेड में 6,000 मवेशियों को समायोजित करना था. वर्तमान में अभयारण्य में लगभग 4,120 गायें हैं. लेकिन वर्तमान में पशुपालन विभाग से प्राप्त धन का उपयोग केवल उनके लिए चारा प्रदान करने में किया जाता है.

इसकी आवर्ती लागत ही 10 करोड़ रुपये से अधिक है लेकिन बजटीय आवंटन उसमें से आधा है. चारे पर लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार अभयारण्य के प्रभारी उप निदेशक डॉ वी एस कोसारवाल ने फंड की कमी को स्वीकार करते हुए कहा, "हमने फरवरी से गायों के प्रवेश पर रोक लगा दी है''.

अभयारण्य के उद्घाटन के बाद वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं की गणना, गाय संरक्षण बोर्ड ने शुरू में 22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था लेकिन वित्त विभाग ने इसे अस्वीकार कर दिया. 14 करोड़ रुपये के लिए एक और प्रस्ताव भी खारिज कर दिया गया था.

अभयारण्य का आय का अपना कोई स्रोत नहीं है. क्योंकि इसमें ज्यादातर गायें बीमार हैं, उन्होंने दूध देना करना बंद कर चुके हैं. परिसर में स्थापित तीन बायो-गैस संयंत्र बिजली प्रदान करते हैं. इस अभ्यारण्य में 6000 गायें रखी जा सकती हैं, 32 करोड़ रुपयों की इस योजना में 24 शेड के अलावा कृषक प्रशिक्षण केंद्र, गौ अनुसंधान केंद्र, गोबर गैस प्लांट और सोलर प्लांट लगाए हैं. जबकि नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुछ विशेषज्ञ कभी-कभी अभयारण्य में जाते हैं.

पशुपालन मंत्री अंतर सिंह आर्य ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को धन की कमी के बारे में बताया है. उनका कहना है कि पैसा जल्द ही जारी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार अभयारण्य के प्रबंधन को एनजीओ को सौंपने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है. फाउंडेशन की आधारशिला पहली बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान 2012 में रखी थी.

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First published: 30 July 2018, 11:15 IST
 
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