Home » मध्य प्रदेश » Madhya Pradesh: Candidates will not be eligible for election if they don't educate their child
 

बच्चों को पढ़ाई से रखा दूर तो नहीं बन पाएंगे नेता, जल्द आ सकता है कानून

न्यूज एजेंसी | Updated on: 29 March 2018, 12:52 IST

मध्य प्रदेश में अशिक्षा को रोकने के लिए एक ख़ास कानून बनाने की मांग उठ रही हैं. सरकार से एक ऐसे कानून की मांग की जा रही है जिससे बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित की जा सके. जिससे बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित जा सके. इस कानून की ख़ास बात यह है कि इस कानून के अंतर्गत वैसे माता- पिता जो अपने बच्चो को पढ़ाई से दूर रखते हैं. उन्हें ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक के चुनाव लड़ने के अयोग्य माना जायेगा. 

राजधानी के समन्वय भवन में बुधवार को राज्य के बाल संरक्षण आयोग द्वारा बाल अधिकारों पर आयोजित कार्यशाला में आयोग अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र शर्मा ने छह से 14 साल तक उम्र के बच्चों को शिक्षा से वंचित रखने वालों को पंच से सांसद स्तर तक के चुनाव के लिए अयोग्य घोषित करने के संबंध में कानून बनाने का प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव का महिला-बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनिस तथा सहकारिता राज्य मंत्री (स्वंतत्र प्रभार) विश्वास सारंग ने समर्थन किया.

आयोग द्वारा बाल अधिकारों की राज्य-स्तरीय कार्यशाला में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009, किशोर न्याय अधिनियम-2015, पॉस्को एक्ट के प्रावधानों तथा चाईल्ड फ्रेंडली पुलिस की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा हुई और जानकारी दी गई. महिला-बाल विकास मंत्री चिटनिस ने कहा कि हमें भारतीय मूल्यों के अनुसार जीवन को समग्रता से समझना होगा. माता-पिता और समाज का व्यवहार बच्चों को प्रभावित करता है. इसलिए माता-पिता की अपने आचरण के प्रति संवेदनशीलता आवश्यक है.

राज्य मंत्री विश्वास सारंग ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम से संबंधित संस्मरण सुनाते हुए कहा कि 'बच्चे ही परिवार, समाज और देश का भविष्य हैं.' इसलिए बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए किए जा रहे कार्य वास्तव में देश के बेहतर भविष्य के लिए किए जा रहे कार्य हैं.

First published: 29 March 2018, 12:52 IST
 
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