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मुस्लिम महिला को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार नहींः MP हाईकोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 July 2018, 12:20 IST
(सांकेतिक फोटो )

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि मुस्लिम महिला को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार नहीं है.  मुस्लिम कानून के तहत, महिला को गुजारा भत्ता मांगने का अधिकार तभी है जब वह किसी भी वैध कारण के बिना उसे अपने पास रखने से इनकार कर देता है. 

कोर्ट ने इसके साथ ही मुस्लिम महिला को हिंदू एक्ट के तहत गुजारा भत्ता देने के निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया है. बता दें कि मुस्लिम महिला को निचली अदालत ने हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 24 के तहत गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था.

निचली अदालत के गुजारा भत्ता दिए जाने के कनीज के पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी. जहां सुनवाई के दौरान कनीज के वकील ने दलील दी कि कोर्ट ने सिर्फ सीआरपीसी के सेक्शन 151 के तहत कनीज को राहत दी है. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए कहा है कि दोनों पक्ष मुस्लिम है. मुस्लिम कानून में पत्नी को रख-रखाव देने का प्रावधान हिंदू मैरिज एक्ट में है. मुस्लिम कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है.

कोर्ट ने अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है. जिसमें जस्टिस शब्बीर अहमद शेख ने कहा था, 'मुस्लिम महिला अंतरिम रख-रखाव के लिए मुस्लिम लॉ के तहत तब वाद दायर कर सकती है, जब उसका पति उसे निकाल दे और उसे रख-रखाव देने से इनकार कर दे. इस टिप्पणी के साथ जस्टिस वंदना कासरेकर ने निचली अदालत का आदेश पलट दिया.

हालांकि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगर पत्नी आंतरिक रख रखाव चाहती है, तो वह सीआरपीसी के सेक्शन 125 के तहत फैमिली कोर्ट में प्रार्थना पत्र डाल सकती है.'

ये था निचली अदालत का फैसला

मुस्लिम महिला कनीज हसन ने सिविल जज के यहां अंतरिम रख-रखाव दिए जाने की मांग करते हुए एक याचिका दाखिल की थी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान कनीज हसन के पति ने कहा कि उनकी पत्नी उनसे अलग रहती है. इसके बाद भी वह गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग कर रही है. गुजारा भत्ता दिए जाने का अधिकार हिंदू मैरिज एक्ट में है. मुस्लिम कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

निचली अदालत ने  अपने फैसले में महिला कनीज हसन को गुजारा भत्ता दिए जाने का आदेश दिया.  निचली अदालत ने महिला को 25000 रुपये अंतरिम रख रखाव के लिए देने का आदेश दिया था. निचली अदालत के इस फैसले को कनीज के पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी. जिसको हाईकोर्ट ने पलट दिया.

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First published: 11 July 2018, 11:47 IST
 
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