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मध्यप्रदेश: सोमवार को तय होगा कमलनाथ सरकार का भविष्य, राज्यपाल ने दिया फ्लोर टेस्ट का निर्देश

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 March 2020, 11:11 IST

Madhya Pradesh Political Crisis: मध्यप्रदेश में मचा सियासी घमासान का क्लाइमेक्स अब तय हो गया है. सूबे के राज्यपाल लालजी टंडन (Governor Lalji Tandon) ने सोमवार (Monday) को विधानसभा (Assembly) में फ्लोर टेस्ट (Floor Test) करने का निर्देश दिया है. इसी के साथ तय हो जाएगा कि कमलनाथ (Kamal Nath) ही मध्यप्रदेश के मुखिया (Madhya Pradesh Chief Minister) होंगे या फिर बीजेपी (BJP) की ओर से शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) को अपनी दावेदारी पेश करने का मौका मिलेगा.

लगभग आधी रात को राजभवन से इस बारे में एक पत्र सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेजा गया है. राजभवन से जारी पत्र में कहा गया है कि मध्य प्रदेश की हाल की घटनाओं से उन्हें प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि उनकी सरकार ने सदन का विश्वास खो दिया है और ये सरकार अब अल्पमत में है. इस पत्र में राज्यपाल ने कहा है कि ये स्थिति अत्यंत गंभीर है और सीएम कमलनाथ 16 मार्च को सदन में बहुमत साबित करें. वहीं खबर है कि कांग्रेस राज्यपाल के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकती है.

इसी के साथ राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का भी निर्देश दिया है. सीएम कमलनाथ और स्पीकर के नाम चिट्ठी में राज्यपाल ने निर्देश दिया है कि 16 मार्च से शुरु हो रहे बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण के फौरन बाद विश्वास मत पर वोटिंग कराई जाए और इसकी वीडियोग्राफी भी होगी. राज्यपाल लालजी टंडन ने ये आदेश बीजेपी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जारी किया है, जिसमें बीजेपी ने राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की थी.

बता दें कि इससे पहले कांग्रेस ने सभी विधायकों को व्हिप जारी कर बजट सत्र के लिए भोपाल में मौजूद रहने का आदेश जारी किया था. इसी के मद्देनजर जयपुर भेजे गए कमलनाथ समर्थक विधायक रविवार को ही भोपाल पहुंच जाएंगे. उधर ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 22 कांग्रेसी विधायक जिन्हें बेंगलूरू में ठहराया गया है. उसने शिवराज सिंह चौहान और सिंधिया की मुलाकात करने की बात कही जा रही है.

बता दें कि इससे पहले इन विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेजा था, जिनमें से छह विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. इसे देखते हुए विधानसभा में कमलनाथ सरकार को बहुमत साबित करना असंभव माना जा रहा है. ऐसे में बेंगलूर में मौजूद कांग्रेस के 16 अन्य विधायक भी इस्तीफा देते हैं तो कमलनाथ सरकार का गिरना तय है.

ये है सीटों का गणित

अगर सिंधिया खेमे के 16 कांग्रेसी विधायक भी इस्तीफा देते हैं तो विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 206 रह जाएगी. उसके बाद बहुमत के लिए 104 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा. लेकिन ऐसे स्थिति में कांग्रेस के पास सिर्फ 92 विधायक ही बचते हैं. वहीं गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी विधायकों के समर्थन के बाद भी कांग्रेस के पास ये आंकड़ा सिर्फ 99 तक ही पहुंचेगा जो  बहुमत के लिए पांच कम है. अगर ऐसा होता है तो बीजेपी को सरकार बनाने का आसानी से मौका मिल जाएगा, क्योंकि बीजेपी के पास 107 विधायक हैं.

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First published: 15 March 2020, 11:11 IST
 
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