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मध्यप्रदेशः जान देकर गरीब किसान ने चुकाया कर्ज, 28 दिनों में 43 आत्महत्या

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2017, 18:32 IST

कर्ज के बोझ से दबे किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने का सिलसिला मध्यप्रदेश में थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस कड़ी में रविवार सुबह सागर जिले में एक और किसान ने आत्महत्या कर ली. किसान ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी और इसके साथ ही 28 दिनों में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक गढ़ाकोटा थाना क्षेत्र के पिपरिया गांव के किसान टेकराम कुर्मी (48) छह एकड़ जमीन का मालिक था. परिजनों के मुताबिक, उस पर बैंक और साहूकार का कर्ज था. उसकी फसल भी बर्बाद हो गई थी, जिस कारण वह तनाव में था. वह रविवार सुबह टहलने निकला, कुछ देर बाद ग्रामीणों ने परिवार को सूचना दी कि गिरवर रेलवे स्टेशन के पास टेकराम ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी.

गढ़ाकोटा थाने के प्रभारी आरएन तिवारी ने किसान के ट्रेन के आगे कूदकर जान देने की पुष्टि की, लेकिन कहा कि टेकराम की आत्महत्या का कारण सामने नहीं आया है. उन्होंने कहा कि यह मामला रेलवे क्षेत्र का है, लिहाजा इस पूरे मामले की जांच जीआरपी कर रही है.

 

अब पुलिस में यह रिपोर्ट नहीं लिखी जाती कि किसी किसान ने कर्ज से परेशान होकर जान दे दी, क्योंकि पूरा महकमा ऊपरी आदेश का पालन करने में लगा है.

इससे पहले, 5 जुलाई को तीन किसानों ने आत्महत्या कर ली थी. प्रदेश की भाजपा सरकार ने स्पष्ट कहा है कि वह किसानों का कर्ज माफ नहीं करेगी. कर्जमाफी और फसलों की वाजिब कीमत की मांग को लेकर पिछले महीने किसानों ने आंदोलन किया था.

उनके आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस ने 6 जून को गोलियां चलाई थीं और लाठीचार्ज किया था, जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई थी. आंदोलन तो खत्म हो गया, लेकिन उसके बाद आत्महत्या का सिलसिला शुरू हो गया. 28 दिनों में 43 किसान अपनी जान दे चुके हैं.

गोलीकांड के एक महीना पूरा होने पर 6 जुलाई से किसान नेताओं ने सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर 'किसान मुक्ति यात्रा' शुरू की है. यह यात्रा 6 राज्यों से होती हुई 18 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचेगी, जहां किसान नेता बड़ी जनसभा कर देश की जनता को बताएंगे कि अन्नदाताओं के प्रति शिवराज सिंह चौहान सरकार का क्या रवैया है.

First published: 9 July 2017, 18:33 IST
 
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