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शिवराज सिंह चौहान: कई साल तक वे जेल में चिकन बिरयानी खाते हैं फिर हमले करते हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 November 2016, 12:07 IST
(फाइल फोटो)

भोपाल में सिमी कार्यकर्ताओं के एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक विवादित बयान दिया है. सोमवार को भोपाल जेल से फरार हुए आठ अंडरट्रायल कैदियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया था.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक भाषण के दौरान इशारों में कहा, "कई साल तक वे जेल में बैठकर चिकन बिरयानी खाते हैं. फिर फरार हो जाते हैं." शिवराज ने इससे पहले एनकाउंटर पर सवाल उठाने वाले लोगों पर कहा था कि यह वोटबैंक पॉलिटिक्स है. उनको रमाशंकर यादव का बलिदान नहीं दिखता.  

'फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई क्यों नहीं?'

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने बयान में सवाल पूछा, "आतंकवाद के मामलों की सुनवाई क्यों नहीं फास्ट ट्रैक अदालतों में होती है?"

शिवराज ने कहा, "जिन पर आतंकवाद से जुड़े मामलों में सुनवाई चलती है, उन्हें सज़ा मिलने में सालों लग जाते हैं. सालों तक उन्हें जेल में चिकन बिरयानी खिलाई जाती है. फिर वे भाग जाते हैं, और फिर अपराध और हमले करते हैं. हमें आतंकवाद से जुड़े मामलों में भी फास्ट-ट्रैक अदालतों की ज़रूरत है."

भोपाल जेल का लिया जायजा

एक वीडियो सामने आने के बाद भोपाल एनकाउंटर सवालों के घेरे में है. हालांकि पुलिस का कहना है कि सिमी के कार्यकर्ताओं ने जब उन पर फायरिंग की, तो आत्मरक्षा में पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें सभी आठ कैदी मारे गए.

मध्य प्रदेश के सीएम ने भोपाल सेंट्रल जेल का भी बुधवार को जायजा लिया. इस दौरान शिवराज ने जेल में सुरक्षा हालात का जायजा लिया. रविवार रात सिमी के आठ कार्यकर्ता जेल की दीवार फांदकर फरार हो गए थे. भोपाल से 10 किलोमीटर दूर इलाके में उन्हें पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया.

भोपाल एनकाउंटर पर सियासत

भोपाल एनकाउंटर पर पिछले तीन दिन से देश की सियासत गरमाई हुई है. मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने बटला हाउस एनकाउंटर की तरह भोपाल में सिमी कार्यकर्ताओं की मुठभेड़ में मौत पर सवाल खड़े किए थे.

दिग्विजय ने कोर्ट की निगरानी में इस एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग की थी. वहीं मंगलवार को दिग्विजय ने कहा था कि अदालत की निगरानी में इस बात की भी एनआईए को जांच करनी चाहिए कि जेल तोड़ने वाला हर शख्स मुस्लिम ही क्यों होता है, हिंदू क्यों नहीं?

मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भोपाल एनकाउंटर को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि आतंकियों को कपड़े बदलने का कब मौका मिल गया. उनकी कलाई पर घड़ी कहां से आ गई?

इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर सवाल उठाते हुए कहा था, "यह है मोदी राज. फर्जी मुठभेड़, फर्जी मामले, रोहित वेमुला, लापता नजीब और एबीवीपी-आरएसएस के गोरक्षकों की गुंडागर्दी." 

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने फेसबुक पोस्ट में इस एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए कहा था कि जिस किसी भी राजनेता या वरिष्ठ पुलिस अफसर ने इस मुठभेड़ का आदेश दिया उसे फांसी की सजा होनी चाहिए. उन्होंने इस तरह के एक केस में अपने फैसले का भी हवाला दिया था.

वहीं मध्य प्रदेश की जेल मंत्री कुसुम मेहदेले ने एनकाउंटर पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा था कि जेल से फरार सिमी के सदस्यों को मार गिराने के लिए उनकी आलोचना के बजाए तारीफ होनी चाहिए.

पुलिस को मुताबिक फरार होने से पहले सिमी के आठ कार्यकर्ताओं ने मुख्य आरक्षी रामशंकर यादव की हत्या कर दी थी. (कैच)
First published: 2 November 2016, 12:07 IST
 
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