Home » मध्य प्रदेश » Supreme court gives notice to modi govt and shivraj govt on 2016 encounter of SIMI activists in Bhopal.
 

SC: सिमी एनकाउंटर की जांच CBI से क्यों न हो?

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 July 2017, 13:17 IST

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आठ सिमी कार्यकर्ताओं के एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर इस मामले को सीबीआई को ना सौंपने पर भी सवाल किए हैं और पूछा कि क्यों न मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य की दोनों सरकारों को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं. 

31 अक्टूबर 2016 को सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी के आठ आतंकियों को एमपी पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया था. इससे पहले सिमी के आतंकी जेल में एक सुरक्षाकर्मी की हत्या करके फरार हो गए थे. इसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया था. 

मुठभेड़ में मारे गए सिमी के इन आतंकियों पर देशद्रोह के मामले चल रहे थे. ये सभी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के रहने वाले थे. ये सभी फरार आठ आतंकवादी जेल के बी ब्लॉक में कैद थे.

क्या है सिमी?

सिमी का पूरा नाम स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया है. सिमी का गठन 1977 में हुआ था. इसका गठन 25 अप्रैल 1977 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ. डॉक्टर मोहम्मद अब्दुल्लाह सिद्दीकी इसके संस्थापक अध्यक्ष थे.

हालांकि सिद्दीकी कहते हैं कि उनके समय में सिमी का स्वरूप बिल्कुल अलग था. केंद्र सरकार ने 2001 में पोटा (आतंकवाद निरोधक कानून) के तहत सिमी पर प्रतिबंध लगा दिया. इस प्रतिबंध के बाद देशभर में सिमी के सबसे ज्यादा कायकर्ताओं की गिरफ्तारी मध्य प्रदेश से हुई.

First published: 24 July 2017, 13:17 IST
 
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