Home » महाराष्ट्र न्यूज़ » MNS chief Raj Thackeray said 80-90 per cent quota for locals, on basis of economic status
 

राज ठाकरे बोले- आर्थिक आधार पर नौकरियों में 80 से 90 फीसदी कोटा मिले स्थानीय लोगों को

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2018, 11:45 IST

आरक्षण के मुद्दे पर एक अलग स्वर में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि जाति या धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति के आधार पर कोटा दिया जाना चाहिए और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. ठाकरे ने स्थानीय युवाओं से आग्रह किया कि वे राजनीतिक दलों के जाल में न फंसें, जो केवल वोटों के लिए लोगों का इस्तेमाल करते हैं.

मनसे अध्यक्ष शुक्रवार को पुणे में पार्टी कार्यकर्ताओं की रैली को संबोधित कर रहे थे. ठाकरे ने उन पार्टियों की आलोचना भी की जो जाति या धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा ''वे केवल वोट मांगने के लिए जनता की भावनाओं के साथ खेलने की कोशिश कर रहे हैं''. राज ठाकरे ने यह भी कहा कि "ककासाहेब शिंदे की तरह कोई और मौत नहीं होनी चाहिए, जिनकी मराठा समुदाय के आरक्षण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के दौरान नदी में कूदकर मौत हो गई थी''.

ठाकरे ने युवाओं से सतर्क रहने और अपने करीबी लोगों को शिक्षित करने का आग्रह किया. ठाकरे बोले "यदि निजी क्षेत्र में शैक्षिक संस्थानों और नौकरियों में 80 से 90 फीसदी आरक्षण स्थानीय लोगों को दिया जाता है, तो किसी भी समुदाय के सदस्यों के लिए आरक्षण की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन राज्य में कोई राजनीतिक दल ऐसा नहीं करना चाहता''.

ठाकरे ने कहा कि कोई राजनीतिक दल "राज्य और देश की सच्ची तस्वीर पेश नहीं कर रहा है. सरकार मानती है कि निजी क्षेत्र में नौकरियां बढ़ रही हैं लेकिन सरकारी कार्यालयों में इसमें कमी आई है. यदि आरक्षण सरकारी संस्थानों और संगठनों तक सीमित है, तो युवाओं को कैसे फायदा होगा? "

बाहरी लोगों पर अपने हमले को जारी रखते हुए ठाकरे ने कहा कि वे राज्य को लूट रहे है. जबकि स्थानीय जाति और धर्म के आधार पर टकराव में लगे है. हमारा कई वर्षों की समृद्ध परंपरा के साथ एक सांस्कृतिक राज्य है. इसे बिहार, उत्तर प्रदेश या झारखंड जैसे अन्य राज्यों में नहीं बदला जाना चाहिए.

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First published: 28 July 2018, 11:43 IST
 
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