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रोड एक्सीडेंट में हो गई थी बेटे की मौत, अब पिता सड़कों पर करता रहता है ऐसा काम...

, कैच ब्यूरो | Updated on: 15 September 2018, 12:56 IST

किसी इंसान की मौक का गम सबसे अधिक एक मां-बाप को ही होता है. मां की आंखों से बहते आंसुओं को देखकर उसके गम का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन एक पिता के सीने में होते दुख का शायद ही कोई पता लगा पाए. जैसा कि मुंबई में एक शख्स पिछले तीन साल से सहन करता आ रहा है. इस शख्स ने 3 साल पहले मुंबई में हुुई एक सड़क दुर्घटना में अपने 16 साल के बेटे को खो दिया. पिता पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो.

सड़क हादसों में कोई अपने परिजनों को ना खोए उसके लिए इस शख्स ने ऐसा कदम उठाया जिसकी चारों ओर तारीफ हो रही है. इस शख्स का नाम है दादाराव बिल्हारे. दादाराव बिल्हारे के 16 साल के बेटे प्रकाश बिल्हारे की जुलाई 2015 में मुंबई के एक सड़क हादसे में मौत हो गई. हादसा मुंबई की टूटी-फूटी सड़कों की वजह से हुआ था. उस दिन आकाश और उसका कजन बाइक से कहीं जा रहे थे. तभी सड़क में हुए एक गड्ढे में उसकी बाइक का धंस गई. जिससे प्रकाश की मौत हो गई और उसका कजन घायल हो गया.

बेटे की मौत से टूट चुके दादाराव बिल्हारे ने उसी दिन ठान लिया कि वो बिना किसी सरकारी मदद के मुंबई की सड़कों के गड्ढों को भरेंगे जिससे इस तरह के हादसे दोबारा ना होने पाएं और कोई अपने परिजन को ना खोए. उस घटना के बाद दादाराव मुंबई की सड़कों पर हो रहे गड्ढों को बालू और बजरी से भर रहे हैं. जिससे टूटी सड़कों की वजह से कोई हादसा ना होपिछले तीन साल में दादाराव मुंबई की सड़कों के करीब 600 गड्ढों को भर चुके हैं.

बता दें कि 40 साल के दादाराव बिल्होर सब्जी बेचने का काम करते हैं. बिल्होर बताते है कि ऐसा कर वो अपने बेटे को श्रद्धांजलि देते हैं और उम्मीद करते हैं को ऐसा करने से वो लोगों की जिंदगी बचाएंगे.बिल्होर बताते हैं, "प्रकाश की मौत से हमारे जीवन में अंधेरा छा गया. उसके बाद प्रकाश हमेशा हमारी यादों में बना रहे और जिससे उसे हमेशा सम्मान मिलता रहे. इसलिए सड़कों के गड्ढे भरता हूं.”

बदा दें कि मानसून के मौसम में अक्सर ही तटीय शहरों में भारी बारिश से सड़कों में गड्ढे और छेद हो जाते हैं. मुंबई की सड़कों के गड्ढे इतने आम हैं कि इन्हें गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सबसे अधिक गड्ढे वाले शहर के रूप में दर्ज करने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है.

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First published: 15 September 2018, 12:56 IST
 
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