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बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला, गहरे प्यार में बने संबंध को रेप मानने से किया इंकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 April 2018, 11:47 IST

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने प्यार और रेप के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. बेंच ने कहा कि गहरे प्यार के दौरान बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप की संज्ञा नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति किसी महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे रेप नहीं कहा जा सकता है. हालांकि कोर्ट ने कहा कि ऐसा तभी संभव है जब दोनों के बीच गहरे प्यार का प्रमाण पत्र मौजूद हो.

हाई कोर्ट ने कहा कि अगर महिला और पुरुष के बीच गहरे प्रेम संबंध के प्रमाण हैं तो पुरुष को रेप का आरोपी नहीं माना जा सकता है. यह फैसला योगेश पालेकर के मामले में आया है, उन पर एक महिला से शादी का वादा करने के बाद रेप का आरोप था और उन पर 7 साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगा था. 2013 के इस मामले में कोर्ट ने आरोपी की सजा और जुर्माने को हटा दिया.

दरअसल, योगेश एक कसीनो में बतौर शेफ काम कर रहे थे तभी उनका एक लड़की के साथ अफेयर हो गया. लड़की ने योगेश पर आरोप लगाया कि योगेश अपने परिवार से मिलवाने के लिए उसे अपने घर ले गए. उस वक्त योगेश क परिवार घर नहीं था. जहां वह रात में रुक गईं और दोनों के बीच संबंध बन गए. अगली सुबह योगेश ने महिला को उनके घर पर ड्रॉप कर दिया.

निम्न जाति के चलते किया शादी से इंकार

महिला के मुताबिक योगेश ने उसके बाद भी 3-4 बार संबंध बनाए. लेकिन कुछ दिनों बाद योगेश ने शादी करने से यह कहते हुए इंकार कर दिया कि वह निम्न जाति से आती है. इसलिए वह शादी नहीं कर सकता. महिला ने इसके बाद आरोपी के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज करा दी. जिसमें उसने आरोप लगाए थे कि उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए.

कोर्ट ने हटाई सजा और जुर्माना

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस सी. वी. भदांग ने पाया महिला ने पालेकर की आर्थिक तौर पर भी मदद करती थी. जस्टिस सी. वी. भदांग ने पाया कि दोनों के बीच सहमति केवल पालेकर के वादों पर ही नहीं बनी, बल्कि उनकी आपसी सहमति से बनी. महिला ना केवल पालेकर को आर्थिक सहायता देती थी, बल्कि गोवा में डिप्रेशन का इलाज कराने की वजह से उसने अपनी शिकायत भी वापस ले ली. कोर्ट ने इन सबके आधार पर कहा कि यह रेप नहीं बल्कि दोनों के बीच प्यार का संबंध था. कोर्ट ने 2013 के इस मामले में आदेश देते हुए आरोपी की सजा और जुर्माने को हटा दिया है.

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First published: 2 April 2018, 11:47 IST
 
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