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भारत में खेलों का हाल, SAI के पास 10 साल में यौन उत्पीड़न की 45 शिकयातें आई, 29 थी कोच के खिलाफ

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 January 2020, 21:58 IST

पिछले एक दशक में 24 विभिन्न सरकारी-संचालित खेल संस्थानों में यौन उत्पीड़न की कम से कम 45 शिकायतें दी गईं. यह जानकारी आरटीआई के माध्यम से प्राप्त हुई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ शिकायते आई उनमें ज्यादातर मामलों में जिन लोगों पर आरोप लगा था उन्हें छोड़ दिया गया है. जबकि कुछ लोगों के खिलाफ एक्शन तो हुआ लेकिन उसमें भी खाना पूर्ति की गई है. रिपोर्ट की मानें तो एक्शन के तौर पर या तो उन लोगों का तबादला हुआ या फिर उनके वेतन या पेंशन में मामूली कटौती की गई. वहीं एक दर्जन से अधिक शिकायतें ऐसी हैं जिन पर सालों के किसी तरह का कोई संज्ञान नहीं लिया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, आरटीआई से जो जानकारी मिली है भारतीय खेल प्राधिकरण ने बताया कि 45 मामलों में से 29 कोचों के खिलाफ हैं. महिला रिपोर्ट के सशक्तिकरण पर एक संसदीय समिति ने पिछले फरवरी में नोट किया था कि "संख्या अधिक हो सकती है क्योंकि कई बार कोचों के खिलाफ मामले दर्ज ही नहीं किए जाते है. इस समिति की रिपोर्ट में आगे कहा गया,'समिति को यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण लगता है कि संरक्षक और मार्गदर्शक खुद (है) ही शिकारी बन जाते है.'


रिपोर्ट की मानें तो SAI(भारतीय खेल प्राधिकरण) ने इस मामले में अभी तक कोई बयान नहीं दिया है. वहीं संगठन के पूर्व महानिदेशक ने जिजी थॉमसन ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया है कि एथलीट्स अक्सर अपनी शिकायतें वापस लेते हैं या अपने बयान बदलते हैं क्योंकि उन्हें अपने करियर खत्म होने का डर होता है ऐसे में उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है.

रिपोर्ट के अनुसार जिजी थॉमसन ने कहा,'इनमें से ज्यादातर लड़कियां विनम्र पृष्ठभूमि से आती हैं.' मार्च 2013 से जनवरी 2015 तक SAI महानिदेशक रहे थॉमसन ने कहा,'उन्हें अपना बयान बदलने या अपनी शिकायत वापस लेने के लिए राजी किया जाता है. लड़कियां इस तथ्य को मान लेती हैं कि खेल में उनका भविष्य और इसके जरिए वो अपनी गरीबी से बाहर आ सकती है. उन्होंने आगे कहा,'लड़कियां यह मान लेती है कि उनका भविष्य उनके कोच के हाथों में होता है इसलिए वे अक्सर हार मान लेते हैं.'

SAI केंद्रों पर जो मामले दर्ज कराए गए हैं वो छेड़छाड़ से लेकर शारीरिक शोषण तक के हैं. यह मामले जिमनास्टिक, एथलेटिक्स, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी और कुश्ती जैसे खेलों में शामिल खिलाड़ियों द्वारा कराए गए हैं. रिपोर्ट की मानें तो कुछ मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया था जबकि कुछ ममाले ऐसे भी हैं जो कई वर्षों से चल रही है और जिन लोगों के खिलाफ मामले चल रहे हैं वो अब युवा एथलीटों को भी ट्रेनिग देते हैं.

खबर के मुताबिक, नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, औरंगाबाद, दमन और दीव, पटियाला, एलुरु, काशीपुर, कटक, कोझीकोड, भोपाल और मयिलादुथुराई में SAI प्रशिक्षण केंद्रों पर उत्पीड़न के अन्य मामले सामने आए हैं.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कम से कम पांच कोच जो दोषी पाए गए थे, उनमें से एक को सजा दी गई जो उसके वेतन में कटौती की थी. एक अन्य मामले में, एक कोच के वेतन से प्रति माह 910 रुपये की कटौती की गई. जबकि एक मामले में कोच का साल भर के लिए इंक्रीमेंट रोक दिया गया था. वहीं दो कोच के अनुबंध समाप्त कर दिए गए जबकि एक को निलंबित कर दिया गया. जबकि पांच अन्य को बरी कर दिया गया था क्योंकि उनके खिलाफ जो आरोप लगाए गए थे वो झूठे थे. गौरतलब हो, बीते साल एक कोच ने नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोप के बाद आत्महत्या कर ली थी.

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First published: 16 January 2020, 21:58 IST
 
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