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आदर्श घोटाला: राहत मिलने के बाद अशोक चव्हाण ने भाजपा पर लगाया ये बड़ा आरोप

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 December 2017, 16:33 IST

शुक्रवार को आदर्श सोसायटी घोटाले में राहत मिलने के बाद कांग्रेस के सीनियर नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने बड़ा बयान दिया. बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर अब आदर्श सोसाइटी घोटाले के मामले में केस नहीं चलेगा. इसके बाद अशोक चव्हाण ने फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा "आखिरकार सच की जीत हुई है. हमें हमेशा से देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है."

दरअसल भाजपा के केंद्र और महाराष्ट्र में सरकार बनाने के बाद साल 2016 में गर्वनर सी विद्यासागर ने सीबीआई की सिफारिश को मानते हुए अशोक चव्हाण के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के गर्वनर सी विद्यासागर द्वारा दिए इस आदेश को रद्द कर दिया है.

अशोक चव्हाण ने आदर्श सोसायटी घोटाले को तूल देने के लिए भाजपा पर करारा हमला बोल. अशोक चव्हाण ने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस को बदनाम करने के लिए इसे मुद्दा बनाया. अशोक चव्हाण ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, "इस मुद्दे का भाजपा ने राजनीतिक इस्तेमाल किया. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की छवि खराब करने के लिए भाजपा ने इसका इस्तेमाल किया." 

गौरतलब है कि इस मामले में नाम आने के बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था. लोकसभा चुनाव 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी और पूरी भाजपा ने यूपीए सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जमकर घेरा था.

इसके अलावा आदर्श सोसायटी घोटाले को महाराष्ट्र के 2014 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने बड़ा मुद्दा बनाया. इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-एनसीपी सरकार को जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया था. विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा और शिवसेना ने हाथ मिलाकर राज्य में सरकार बनाई. चुनाव में ये दोनों सहयोगी अलग-अलग लड़े थे.

क्या है आदर्श घोटाला?

आदर्श सोसायटी दक्षिण मुंबई के कोलाबा में स्थित 31 मंजिला इमारत है. ये सोसाइटी कारगिल और दूसरे युद्धों में शहीद हुए सैनिकों की पत्नियों के लिए बनाई गई थी. बाद में कई राजनेताओं, नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को इसका सदस्य बनाया गया और उन्हें फ्लैट दिए गए. 

भारत के कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की 2011 की रिपोर्ट में इस घोटाले के भ्रष्टाचार का सबसे अच्छा नमूना कहा गया था जिसमें ऊंचे पदों पर बैठे लोग कीमती सार्वजनिक जमीनों को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करने के लिए नियमों को तोड़-मरोड़ देते हैं. जब ये घोटाला हुआ तब महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार थी और कांग्रेस के अशोक चव्हाण सीएम थे.

साल 2011 में मामले की जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश जेए पाटिल और एनएन कम्भर का दो सदस्यीय जांच कमीशन बनाया गया. कमीशन ने दो साल तक जांच करके, 182 चश्मदीदों के गवाहों से पूछताछ करने के बाद अप्रैल, 2013 में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी. पाटिल कमीशन के अनुसार आदर्श सोसायटी में 22 फ्लैट गैर-कानूनी तौर पर दिए गए. वहीं 22 फ्लैट जाली नामों से खरीदे गए.

रिपोर्ट में महाराष्ट्र के चार पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण, विलासराव देशमुख, सुशीलकुमार शिंदे और शिवराज पाटिल, दो पूर्व शहरी मंत्रियों राजेश टोपे और सुनील टटकरे और एमसीजीएम के पूर्व प्रमुख जयराज पाठक समेत 12 नौकरशाहों का जिक्र किया गया था.

First published: 22 December 2017, 16:33 IST
 
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