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गोआ के बाद मणिपुर में भाजपा सरकार, कांग्रेस मुक्त होने को अग्रसर पूर्वोत्तर

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 March 2017, 6:57 IST

गोआ में कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाने के बाद भाजपा ने अब मणिपुर में भी एन बिरेन सिंह को मुख्यमंत्री बना कर अपनी सरकार बनाने की तैयारी कर ली है. सिंह का शपथ ग्रहण समारोह बुधवार को इम्फाल में संपन्न हुआ. यहां राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. उन्होंने नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चार विधायकों से मुलाकात के बाद भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाने का निर्णय लिया.

नजमा ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के भी चार विधायकों से मुलाकात की, जिन्होंने भाजपा के समर्थन का आश्वासन दिया. इसके अलावा एक नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक और एक एलजीपी विधायक ने भी भाजपा को समर्थन दिया है. इसके साथ ही 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 31 सीटों का बहुमत हो जाता है. पार्टी को इस चुनाव में जीत कर आए एक मात्र निर्दलीय विधायक से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है.

चुनाव में 28 सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस को दूसरी पार्टियों का समर्थन नहीं मिला और वह सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर सकी. इसके साथ ही राज्य में 15 साल पुराने कांग्रेस शासन का अंत हो गया और पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था.

इससे पहले सोमवार को इबोबी सिंह राज्यपाल से मिले थे लेकिन वे अपने साथ केवल 27 विधायकों का ही समर्थन दिखा सके, क्योंकि एक विधायक ने सार्वजनिक तौर पर भाजपा को समर्थन देने का एलान कर दिया था. इसके बाद ही भाजपा के बिरेन ने राज्यपाल से मिल कर सरकार बनाने के लिए दावा पेश कर दिया.

हालांकि बहुमत सिद्ध करने से पहले बिरेन के सामने अब भी एक समस्या है. एनपीएफ ने भाजपा के सामने शर्त रखी है कि वे तभी समर्थन देंगे जब भाजपा उनके चारों विधायकों को महत्वपूर्ण मंत्रालयों में शामिल करे.

सोमवार को पार्टी अध्यक्ष अवानबंग न्यूमाई ने भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष को पत्र लिख कर अपनी ये मांगें गिनवा दी थीं. पत्र में मांग की गई कि एनपीएफ के तीन विधायकों को संसदीय सचिव बना कर महत्वपूर्ण विभाग दिए जाएं.

पार्टी ने मांग की कि उनके विधायक न्यूमाई को पहाड़ी एवं जनजातीय विकास, लघु सिंचाई व कार्य विभाग दिया जाए जबकि चिवाई से जीतने वाले खासिम वशूम के लिए योजना एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की मांग की. साथ ही विधायक के. लिशिउ के लिए पार्टी ने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण व ग्रामीण विकास विभाग की मांग की.

सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व एनपीएफ आलाकमान के साथ वार्ता करके उनकी मांगें कम करने के बारे में बात करेगा. एनपीएफ की इन मांगों से कांग्रेस को थोड़ी राहत जरूर मिली है, क्योंकि इन चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरने के बावजूद कांग्रेस यहां विपक्ष में बैठेगी. हालांकि एनपीएफ ने यह नहीं बताया कि अगर भाजपा ने उनकी मांगें नहीं मानी तो वे क्या करेंगे.

इस बीच, इस बात पर भी फिलहाल संशय है कि एक मात्र निर्दलीय विधायक असाबुद्दीन किसका समर्थन करेंगे. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही असाबुद्दीन का समर्थन अपने साथ होने का दावा कर रहे हैं. कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने असाबुद्दीन का अपहरण कर लिया है.

12 मार्च को कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता आर.एस. सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा था ‘‘भाजपा अब सीआईएसएफ और एयरपोर्ट अधिकारियों का दुरूपयोग कर रही है. पार्टी ने इम्फाल एयरपोर्ट पर निर्दलीय विधायक असाबुद्दीन को एयरपोर्ट अधिकारियों की मदद से पकड़वा कर अपहरण कर लिया और उन्हें कोलकाता ले गई.’’

उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव में कम सीटें जीतने के बाद अब भाजपा इम्फाल एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ का दुरूपयोग कर लोकतंत्र के साथ खतरनाक खिलवाड़ कर रही है.’’ बाद में सुरजेवाला ने दावा किया कि अपहरण के बाद असाबुद्दीन कांग्रेस नेता अबु नासिर के साथ थे. इसके तुरंत बाद ही भाजपा ने दावा
किया कि असाबुद्दीन भाजपा में शामिल हो चुके हैं.

एनपीपी के समर्थन पर तो और भी ड्रामा हुआ. कांग्रेस ने राज्यपाल के समक्ष जा कर एनपीपी के समर्थन का पत्र पेश कर दिया. हालांकि नजमा हेपतुल्ला ने बाद में बताया एनपीपी ने ऐसा ही पत्र भाजपा के समर्थन में पेश किया है. मंगलवार को एनपीपी के संगमा ने कहा कि यह पत्र फर्जी है.

इस सारे राजनीतिक ड्रामे के बीच भाजपा मणिपुर में सरकार बना रही है. इसका पूरा श्रेय हेमन्त बिस्वा सरमा को दिया जाना चाहिए. दरअसल सरमा की वजह से ही आज भाजपा का कांग्रेस मुक्त पूर्वोत्तर का सपना साकार हो सका है. असम में जीत का परचम लहराने के बाद सरमा ने अरुणाचल प्रदेश में सरकार बनाने के लिए सारे कांग्रेसी विधायकों को भाजपा में शामिल कर लिया.

अब सरमा की निगाहें पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों जैसे नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय पर है. यहां 2018 में चुनाव होंगे. सरमा को भाजपा के मणिपुर में 0-21 के सपने को साकार करने का श्रेय दिया जा सकता है. इस प्रकार कांग्रेस के पास अब केवल मेघालय और मिजोरम शेष रह जाएंगे. इतनी बड़ी पार्टी को अब पुनः यह विचार करना पड़ रहा है वह भाजपा और सरमा के साथ कैसे निपटे कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में कांग्रेस का राजनीतिक अस्तित्व बचा रह सके.

First published: 16 March 2017, 6:57 IST
 
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