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बंटेगी सपा: यादव कुनबे की महाभारत के 5 अध्याय

सुधाकर सिंह | Updated on: 5 May 2017, 14:15 IST
(कैच)

शिवपाल यादव ने कहा है कि उनकी नई पार्टी का नाम समाजवादी सेकुलर मोर्चा होगा. पिछले दस महीने से पार्टी में जिस तरीके से उठापटक चल रही थी, उसके बाद से ये तय माना जा रहा था कि अब मुलायम सिंह अपनी ही सजाई-संवारी पार्टी से निकलने वाले हैं. अब शिवपाल के बयान से साफ़ हो गया है कि सपा बंटने जा रही है. एक नज़र उन घटनाक्रमों पर, जिन्होंने सपा में इस बंटवारे और नई पार्टी के गठन की पटकथा लिखी है:

1. 22 जून 2016

समाजवादी पार्टी में पिछले साल सबसे पहले विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय को अखिलेश यादव ने मंजूरी नहीं दी. पूर्वांचल के माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खिलाफ अखिलेश ने सख्त रुख अपनाया. उस वक्त अखिलेश सपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, जबकि मुलायम सिंह यादव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. इसके चार महीने बाद जब शिवपाल मंत्री पद से हटाए गए तो 24 अक्टूबर को पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में मुलायम की मौजूदगी में ही अखिलेश और उनके बीच सपा दफ्तर में धक्का-मुक्की की नौबत आ गई. शिवपाल ने अखिलेश से माइक छीन लिया. 

2. 28 दिसंबर 2016

यादव परिवार का विवाद टिकट बंटवारे के बाद और सतह पर आ गया, जब मुलायम और शिवपाल की तरफ से जारी 325 उम्मीदवारों की लिस्ट में अखिलेश के करीबियों जैसे पवन पांडे, अरविंद सिंह गोप और राम गोविंद चौधरी का पत्ता काट दिया गया. इसके ठीक बाद 29 दिसंबर को ही अखिलेश ने अपने 235 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी.

3. 30 दिसंबर 2016

अखिलेश की तरफ से अलग लिस्ट जारी करने के 24 घंटे के अंदर मुलायम ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का हवाला देते हुए अखिलेश और रामगोपाल यादव को सपा से छह साल के लिए निकाल दिया, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के दबाव में 24 घंटे के अंदर ही मुलायम ने फैसला रद्द कर दिया.

4. 1 जनवरी 2017

इसके बावजूद अखिलेश समर्थक रामगोपाल यादव का धड़ा अड़ा रहा. रामगोपाल यादव ने एक जनवरी 2017 को लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में सपा के आपातकालीन अधिवेशन में चार बड़े एलान किए. इसके जरिए अमर सिंह की सपा से और शिवपाल यादव की प्रदेश अध्यक्ष पद से बर्खास्तगी के अलावा अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुलायम सिंह को सपा का संरक्षक बनाया गया. नरेश उत्तम को यूपी सपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया.

5. 19 फरवरी 2017

सिंबल विवाद में जीत हासिल करने के बाद अखिलेश ने शिवपाल को जसवंतनगर सीट से टिकट तो दे दिया, लेकिन दोनों के बीच संबंध बिगड़ते चले गए. मतदान के दिन भी शिवपाल ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने ऊपरी इशारे के बाद उनके समर्थकों पर लाठीचार्ज किया गया.

19 फरवरी को वोटिंग के दौरान जसवंतनगर में उनके काफिले पर पथराव की घटना भी सामने आई. सैफई में यादव कुनबे के लोग अलग-अलग वोट डालने पहुंचे. अखिलेश यादव अपनी पत्नी डिंपल के साथ आए, जबकि मुलायम ने अपनी दूसरी पत्नी साधना यादव, बहू अपर्णा और शिवपाल के परिवार के साथ वोट डाला. इस दौरान साधना ने कहा कि अखिलेश और प्रतीक मेरी दो आंखें हैं. हालांकि यूपी चुनाव के नतीजे आने से पहले ही 7 मार्च को साधना ने  समाचार एजेंसी एएनआई को दिए लंबे-चौड़े इंटरव्यू में जमकर भड़ास निकाली. साधना ने कहा, "अब हम पीछे नहीं हटेंगे. मेरा बहुत अपमान हुआ है."

First published: 5 May 2017, 14:15 IST
 
सुधाकर सिंह @sudhakarsingh10

कैच हिंदी टीम, वो अमीर हैं निज़ाम-ए-जहां बनाते हैं, मैं फ़क़ीर हूं मिज़ाज-ए-जहां बदलता हूं...

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