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एक मोदी समर्थक का खुला ख़त- आपसे हिसाब तो नहीं मांग रहा, लेकिन सवाल कई हैं

अमितेश गौरव | Updated on: 26 May 2017, 17:04 IST

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को 3 साल पूरे कर लिए हैं. आज ही के दिन नरेंद्र मोदी ने भारत के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. अरे माफ़ कीजिएगा प्रधानमंत्री नहीं 'प्रधानसेवक' ऐसा मोदी जी ने ही कहा था.

मोदी जी जब पहली बार भारतीय लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन पहुंचे और संसद की सीढ़ियों को चूमा, तो देश की जनता को लगा कि पहली बार कोई राजनेता नहीं राजसेवक हमारा प्रतिनिधित्व करने आया है. देश के युवाओं को देश की असली पूंजी बताने वाले मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद युवा पीढ़ी में एक अलग ही चेतना का संचार हुआ था.

आपकी बातों से हम युवाओं को ये लगा कि कोई तो देश की राजनीति में ऐसा आया है, जो वोट बैंक की राजनीति नहीं करता, जातिवाद की राजनीति नहीं करता, बल्कि देश की असल पूंजी हम नौजवानों की बात करता है. आपकी इन्हीं बातों से प्रभावित होकर सब ने आपको जी-भर के वोट दिए और प्रचंड बहुमत से आपको देश का प्रधानमंत्री बनाया.

अपने कहा था कि हम अपने काम का हिसाब देंगे. तो आज आपके सरकार के 3 साल पूरे होने के बाद मैं भारत देश के एक जागरूक नौजवान के नाते आपसे हिसाब तो नहीं मांग रहा मगर एक सवाल जरूर है मेरा? माननीय मोदी जी देश के नौजवानों के लिए क्या किए हैं आप जरा ये बताएंगे? 

श्रम मंत्रालय ने वर्ष 2013-14 के दौरान भारत में बेरोजगारी की दर का अध्‍ययन किया है. मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले वित्‍तीय वर्ष में बेरोजगारी दर बढकर 4.9 प्रतिशत पहुंच गई है. आज भी देश का नौजवान छोटे शहरों से पलायन के लिए मजबूर है. अपने प्रियजनों को छोड़कर बड़े शहरों में अपने सुनहरे भविष्य की कल्पना से आते हैं. मगर सच्चाई ये है कि ये मेट्रो शहर उन नौजवानों को कभी नहीं अपनाते. वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होते हैं.

बेरोजगारी का आलम ये है जनाब कि इंजीनियरिंग की डिग्री लिए हुए युवा चपरासी के पदों के लिए आवेदन कर रहे हैं. जरा बताएंगे क्या है इन युवाओं का दोष. क्या उन्हें भारत में पैदा होने की सज़ा मिल रही है. लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है और मिल भी रहा है तो उनकी योग्यता से बहुत कम. अगर देश की इस पीढ़ी का भविष्य नहीं सुधरा, तो देश फिर कभी विकासशील से विकसित राष्ट्र नहीं बन पाएगा. मोदी जी आपसे निवेदन है कि प्लीज इस विषय पर गंभीरता से मंथन करने की जरूरत है. मन की बात करने से कुछ नहीं होगा मन की बात सुननी भी पड़ेगी.

अपने चुनावी भाषण में ब्लैक मनी की बात करते हुए सबके अकाउंट में 15-15 लाख रुपये आने की बात की थी, जानना चाहूंगा कि अब तक कितना ब्लैक मनी वापस आया. और तो और विजय माल्या 9000 करोड़ रुपये लेकर देश से भाग गया इस पर क्या कर रही है सरकार?

सेना

पिछले साल जब हमारी सेना ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक किया था तो लगा की आपके 56 इंच सीने वाली बात में दम है. मगर हाल ही में हुए सुकमा अटैक ने दिल तोड़ दिया. जवानों की आए दिन मौतें हो रही हैं और हम कड़े शब्दों में निंदा कर रहे है. क्या देश के जवानों के मौत की कोई कीमत नहीं है?

कब तक पाकिस्तान आंख दिखाता रहेगा और देश के वीर सपूत अपने प्राणों की आहुति देते रहेंगे. देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि जब बॉर्डर से गोली चलेगी तो जवाब में गोलिया नहीं गिनी जाएंगी. मगर आज कश्मीर में आतंकवाद चरम पर है. उम्मीद करता हूं कि देश की बहनों के धुलते हुए सिंदूर का मान रखेंगे और आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए कड़े कदम उठाएंगे.

ऐसा नहीं है कि आपके आने से देश में बदलाव नहीं आया है. आप की कुछ योजनाओं से देश की जनता की स्थिति सुधरी है. जन-धन योजना से जहां देश के गरीबों के बैंक अकाउंट खुले हैं, वहीं उज्ज्वला योजना से देश की गरीब माताओं के जीवन में उजाला आया है. आपके नोटबंदी के फैसले को भी देश ने सर आंखों पर रखा था और लम्बी-लम्बी कतारों में लग कर देश आपके साथ खड़ा था.

देश के नौजवानों को आपसे बहुत उम्मीदें हैं. तो प्लीज पुरानी राजनीति के दलदल से बाहर निकालें मोदी जी. सच्चे मायनों में देश के प्रधानसेवक बनिए नेता तो बहुत आए और गए. देश का युवा आपको प्यार करता है और आपको राजनेता नहीं जनता के रूप में देखना चाहती है. आपके हर फैसले का सम्मान करते हुए देश आपके साथ खड़ा है और उम्मीद करता है कि आप उसे उसके सपनों का भारत देंगे.

(अमितेश गौरव, सीनियर SEO Executive, कैच हिंदी)

First published: 26 May 2017, 17:04 IST
 
अमितेश गौरव @https://twitter.com/amiteshkumargau

मेरी बातों से आप का सहमत होना जरुरी नही.आप ने मेरी बातों को पढ़ा इसके लिए आप को हार्दिक धन्यवाद.

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