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मोदी सरकार के ख़िलाफ़ उठने लगीं आवाज़ें, सिन्हा के बाद शिवसेना ने खोला मोर्चा

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 September 2017, 14:21 IST

आर्थिक संकट पर घिरी मोदी सरकार में अब असंतुष्ट आवाज़े उठने लगी हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के मारक लेख के बाद अब महाराष्ट्र में सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भी भाजपा पर सीधा हमला किया है. उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा है कि वह देश की अर्थव्यवस्था की हालत पर यशवंत सिन्हा की टिप्पणियों को गलत साबित करके दिखाए. यशवंत सिन्हा ने बुधवार को देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद देश की सियासत में भूचाल आ गया है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' और 'दोपहर का सामना' में प्रकाशित संपादकीय में कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम जैसे अर्थशास्त्री कह रहे थे तो उन्हें पागल कहा गया और जब शिवसेना और अन्य ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए तो उन्हें देशद्रोही कहा गया.

सामना के संपादकीय के मुताबिक, "भाजपा के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इन झूठे विचारों की बखिया उधेड़ी है. उन्होंने कई बयान दिए हैं और अब आप साक्ष्य देकर उन्हें गलत साबित करो."

संपादकीय में हवाला दिया गया कि रूस के तानाशाह जोसेफ स्टालिन के शासन में उनकी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को रातोंरात गायब कर दिया गया या उन्हें यातनागृह शिविरों में भेज दिया गया. सिन्हा ने सच बोला है. उन्होंने कई मुद्दों पर रोशनी डाली है, जिन्होंने तबाही मचाई है. इसमें नोटबंदी और देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत भी शामिल है. हमने यह देखना है कि उन्हें क्या सजा मिलेगी.

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने यशवंत सिन्हा को देश का वित्त मंत्री बनाया था और उनके विचारों को सोशल मीडिया नेटवर्को पर प्रचारकों द्वारा आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता. इन दिनों भाजपा सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं. मेक इन इंडिया जैसी योजनाएं बेहतहाशा खर्च के बावजूद फ्लॉप रही हैं लेकिन इन्हें विज्ञापनों के जरिये सफल बताया जा रहा है.

शिवसेना ने कहा, "सिन्हा ने सरकार के उन खोखले दावों को बेनकाब कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश की जीडीपी दर 5.7 फीसदी है लेकिन असल में यह 3.7 फीसदी है. जब कांग्रेस के मनमोहन सिंह और चिदंबरम ने भी यही बातें कही थीं तो उन्हें भाजपा ने पागल की संज्ञा दी थी."

यशवंत सिन्हा के अलावा पार्टी में और भी कई नेता हैं जो भाजपा के कामकाज की शैली को लेकर असंतुष्ट हैं. कई ऐसे नेता हैं जिन्हें मंत्री अरुण जेटली का बढ़ता क़द रास नहीं आ रहा है. लिहाज़ा, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि अब शिवसेना के बाद अगला मोर्चा भाजपा में कौन खोलता है.

First published: 28 September 2017, 13:32 IST
 
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