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एयरसेल-मैक्सिस केस: मारन बंधुओं को बरी करने के खिलाफ ED पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 February 2017, 12:20 IST
(फाइल फोटो)

एयरसेल-मैक्सिस डील में पूर्व टेलीकॉम मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन को बरी करने के दिल्ली की अदालत के फैसले के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. 

एयरसेल-मैक्सिस करार मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन, उनके भाई कलानिधि मारन और सभी आरोपियों को बृहस्पतिवार को बरी कर दिया गया था. पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने इस मामले में अपने संक्षिप्त आदेश में कहा, "मैं सभी आरोपियों को दो मामलों में बरी करता हूं." केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मारन और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले की जांच की थी. 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश पर रोक से इनकार

सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिका पर शुक्रवार को दोपहर बाद सुनवाई हुई. हालांकि अदालत ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट के मारन बंधुओं को बरी करने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इस मामले में अगली सुनवाई 8 फरवरी को होगी. 

ईडी ने सुनवाई के दौरान दलील देते हुए कहा कि सीबीआई अदालत ने प्रक्रिया का ठीक से पालन नहीं किया इसलिए बॉन्ड लेकर मारन बंधुओं को बरी करने के फैसले पर रोक लगनी चाहिए.

ईडी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ट्रायल कोर्ट में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है. ईडी की तरफ से कहा गया कि मारन बंधुओं की जब्त की गई संपत्ति को भी वापस देने का आदेश दिया गया है, जो कि कानूनन सही नहीं है.

क्या है पूरा मामला?

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मारन बंधुओं समेत बाकी अभियुक्तों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को भी खंगाला था. सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में मारन पर आरोप लगाया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मलेशिया की मैक्सिस कंपनी के मालिक टी आनंदन कृष्णन के साथ आपराधिक साजिश रची थी.  

इन कंपनियों का मालिकाना हक कलानिधि मारन के पास था और पैसे को इन कंपनियों ने अपने कारोबार के लिए इस्तेमाल किया. विशेष जज ने सभी को बरी करते हुए कहा कि इन सभी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं थे. 

दयानिधि मारन पर आरोप है कि उन्होंने चेन्नई की दूरसंचार कंपनी के प्रवर्तक शिवशंकर पर 2006 में एयरसेल और उसकी सहायक फर्मों में अपनी हिस्सेदारी मलेशियाई कंपनी मौक्सिस समूह को बेचने का दबाव बनाया था. पूर्व मंत्री ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया था.

वहीं, वरिष्ठ वकील और कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने 8 जुलाई को सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को भेजे पत्र में मांग की थी कि एयरसेल के स्पेक्ट्रम पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया था कि अगर एयरटेल और आरकॉम के प्रस्तावित सौदे को होने दिया जाता है तो उसकी मलेशियाई कंपनी भाग निकलेगी.

पत्र में कहा गया कि सीबीआई ने एयरसेल-मैक्सिस के मलेशियाई मालिक आनंद कृष्णन के खिलाफ विस्तृत आरोप पत्र दायर किया है और प्रवर्तन निदेशालय ने भी उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है. प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व दूरसंचार मंत्री की परिसंपत्तियां भी जब्त कीं लेकिन मैक्सिस की नहीं.

मलेशिया की मैक्सिस कम्यूनिकेशंस की एयरसेल में 74 प्रतिशत हिस्सेदारी है और शेष हिस्सेदारी 26 प्रतिशत सिंदिया सिक्योरिटीज एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के पास है.

First published: 3 February 2017, 12:20 IST
 
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