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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोदी के वाराणसी से निर्वाचन के ख़िलाफ़ अजय राय की याचिका ख़ारिज की

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 December 2016, 9:43 IST
(पीटीआई)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन को चुनौती देने वाली कांग्रसी नेता अजय राय की याचिका खारिज कर दी है.

इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने ऐसी चुनाव याचिका को कोर्ट में दायर करने के लिए अजय राय की कड़ी आलोचना भी की. 2014 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से अजय राय बतौर कांग्रेस उम्मीदवार मोदी के खिलाफ उतरे थे.

इस मामले में कोर्ट का साफ रुख था कि पीएम के निर्वाचन के मामले में ऐसे आरोप लगाए गए जो अस्पष्ट एवं बिना मजबूत तथ्यों के समर्थन के बयान वाले थे.

हाईकोर्ट ने एडिशन सॉलिसिटर जनरल और विधि आयोग के सदस्य सत्यपाल जैन के नेतृत्व में मोदी का प्रतिनिधित्व करने वाली वकीलों की टीम की प्रारंभिक आपत्तियों को स्वीकार किया.

सोमवार को खुली अदालत में आदेश लिखवाना शुरू करने वाली अदालत ने नामांकन पत्र में पत्नी जशोदाबेन की संपत्ति और दायित्वों के संबंध में कालम के सामने मोदी द्वारा 'नहीं पता' लिखने पर याचिकाकर्ता की ओर से की गई अपील को खारिज कर दिया.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, "यह आरोप लगाते हुए कि 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च किया गया, याचिकाकर्ता यह निर्दिष्ट करने में असफल रहे कि ये भुगतान किसने किए, किसे किए और भुगतान का तरीका क्या था. इसमें स्पष्ट बातें नहीं बताई गई हैं और आरोप मीडिया की खबरों पर आधारित 'अस्पष्ट और बगैर स्पष्टीकरण वाले हैं."

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी का हिस्सा रहे अजय राय ने 2014 के चुनाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद तीसरे नंबर पर रहे थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी.

उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मोदी के चुनाव प्रचार में '50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च' किया गया.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि प्राचीन मंदिरों वाले इस नगर में कई आलीशान होटलों को '24 अप्रैल, 2014 से 12 मई 2014 की अवधि के दौरान' बुक किया गया था.

इसके अलावा अजय राय ने यह भी दावा किया था कि प्रचार करने तथा 'हर हर मोदी, घर घर मोदी' और 'अबकी बार मोदी सरकार' जैसे नारों को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से '400 से अधिक वैन' लगाई गई थीं.

हालांकि कोर्ट ने एडिशन सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन की दलील से सहमति जताई कि "याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड में कोई भी सामग्री पेश करने में असफल रहे कि ये खर्चे सीधे उम्मीदवार द्वारा अथवा उनके निर्देश पर उनके समर्थकों द्वारा किये गए."

First published: 8 December 2016, 9:43 IST
 
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