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अमित शाह ने कर दिया फाइनल, यूपी के इन 50 सांसदों के कटेंगे लोकसभा टिकट

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 July 2018, 12:25 IST

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने दो दिन के दौरे पर 4 और 5 जुलाई को उत्तर प्रदेश में थे. साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उनका यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है. अपने इस दौरे पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य के वर्तमान के सांसदों के काम-काज और उनकी छवि को लेकर यूपी के विस्तारकों, पन्ना प्रमुखों के अलावा संगठन और संघ के पदाधिकारियों के साथ गुफ्तगू की.

इसके बाद खबर निकलकर आ रही है कि यूपी के 35 से 50 सांसदों की निगेटिव रिपोर्ट मिली है. इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 50 सांसदों का टिकट आने वाले लोकसभा चुनाव में कट सकता है. यह खबर जैसे ही मौजूदा सांसदों तक पहुंची तो सभी में हड़कंप मच गया. सभी सांसद पार्टी के अंदर बैठे बड़े नेताओं से संपर्क कर लिस्ट में किसके-किसके नाम हैं उसकी जानकारी ले रहे हैं.

टिकट कटने की सुगबुगाहट मिलते ही बीजेपी के सभी 68 सांसदों की धड़कनें तेज हो गई हैं. चार साल तक अपने संसदीय क्षेत्र में काम न करने वाले सांसद भी आरएसएस से लेकर प्रदेश और क्षेत्रीय संगठनों के बड़े पदाधिकारियों के दरवाजों की परिक्रमा लगाना शुरू कर दिए हैं.

खबर है कि कानपुर-बुंदलेखंड के 9 सांसदों में 6 के टिकट कटने लगभग तय हैं. इनकी जगह नए उम्मीदवारों की खोज आरएसएस और पदाधिकारियों ने करनी शुरू भी कर दी है. दावेदार सुबह से लेकर देर रात तक गांव-गली, मोहल्लों की खाक छान रहे हैं तो वहीं वर्तमान सांसद भी पीछे हटने को तैयार नहीं. वह अपने करीबी नेताओं के जरिए टिकट पक्का करने का जुगाड़ लगा रहे हैं.

बता देें कि चार जुलाई को अमित शाह काशी, अवध और गोरखपुर क्षेत्रीय संगठनों के साथ लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिए मिर्जापुर और वाराणसी आए थे. उसके बाद पांच जुलाई को आगरा गए और वहां उन्होंने ब्रज, कानपुर और पश्चिम क्षेत्रीय संगठन के नेताओं के साथ बैठक की.

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उनके दौरे के बाद ही यूपी के सियासी हलके में मौजूदा 50 सांसदों को दोबारा प्रत्याशी न बनाए जाने की अटकलें लगने लगी हैं. खबर है कि खुद आरएसएस भी मौजूदा सांसदों के खिलाफ है और एक रिपोर्ट बनकर संघ प्रमुख मोहन भागवत के पास भी जा चुकी है. ऐसे में तय माना जा रहा है कि यूपी की 80 सीटों में से कम से कम 50 सांसदों के टिकट कटेंगे. यह वर्तमान सांसद संगठन में काम करेंगे.

गौरतलब है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यूपी की 80 सीटों में से 71 सीटें जीती थीं इसके अलावा उसके सहयोगी दल अपना दल के भी दो सांसद जीते थे. वहीं गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी को हार का मुह देखना पड़ा जिसके बाद मौजूदा समय में भाजपा के 68 सांसद रह गए हैं.

रिपोर्ट है कि ज्यादातर सांसदों का काम जमीन पर शून्य रहा है. चार साल तक सांसद जनता के बजाए दिल्ली में डेरा जमाए रहे. वह मोदी सरकार की योजनाओं की जानकारी के अलावा अपने खुद के फंड से काम नहीं करवा पाए. कुछ पिछड़े और दलित सांसद भी हैं, जो भाजपा के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक चुके हैं.

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वहीं कुछ सांसदों के कदाचरण की शिकायतें पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पास पहुंची हुई हैं. इस समय यूपी में सबसे ज्यादा पिछड़े वर्ग और दलित सांसद हैं. सूत्र बताते हैं कि कुछ दलित भाजपा सांसद टिकट कटने की जानकारी मिलते ही बसपा के बड़े नेताओं के संपर्क में है और किसी भी वक्त पार्टी छोड़कर मायावती के साथ जा सकते हैं.

एक सांसद ने तो बीते दिन मायावती को मंच से अपना नेता माना और दावा भी किया कि वह ही दलितों की बड़ी नेता हैं. ऐसे में अटकलें तेज हैं कि कई दलित सांसद जो बसपा में पहले थे, उनकी घर वापसी हो सकती है.

First published: 8 July 2018, 12:20 IST
 
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