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अनिल माधव दवे: 'नर्मदा का नाविक' जो हर छोटी नदी को ज़िंदा रखना चाहता था

सुधाकर सिंह | Updated on: 18 May 2017, 12:09 IST
अनिल माधव दवे/ फेसबुक

अनिल माधव दवे शायद भारत के पहले ऐसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय संभालने वाले मंत्री थे, जिन्हें प्रभार लेने से पहले ही एक पर्यावरणविद के रूप में अच्छी तरह जाना जाता था. उनके पूर्ववर्ती प्रकाश जावड़ेकर, जो अब मानव संसाधन विकास मंत्री हैं, न तो पहले और न ही उनके कार्यकाल के दौरान पद पर फिट बैठे.

यहां तक कि जयराम रमेश यकीनन अब तक के सबसे प्रसिद्ध पर्यावरण मंत्री रहे, लेकिन उन पर भी एक ठप्पा था. जब उन्होंने कार्यभार संभाला, तब उन पर विकास का समर्थन करने वाले विश्व बैंक के समर्थक अर्थशास्त्री होने का ठप्पा था. हालांकि कार्यभार संभालने के बाद उनके बारे में दावा किया गया था कि वे एक पर्यावरणविद् में परिवर्तित हो गए थे. 

अनिल माधव दवे ने जलवायु परिवर्तन पर एक किताब लिखी और पर्यावरण के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाते रहे. लेकिन वास्तव में जिस कारण से उनको जाना जाता है, वह है नर्मदा पर उनका काम.

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नर्मदा के लिए किया काम

अनिल माधव दवे सेना के विमान से नर्मदा का चक्कर लगा चुके थे. 1,312 किलोमीटर लंबी इस नदी में वे राफ्टिंग भी कर चुके थे. 60 साल के दवे मूल रूप से गुजराती थे. ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में वे मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते थे.

प्रकाश जावड़ेकर की जगह पर्यावरण मंत्री बने अनिल माधव दवे एक ऐसे शख्स थे, जिनको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्योग समर्थक एजेंडे को किताब में ढालने के लिए पुरस्कृत किया गया.  

पढ़ें: केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे का निधन, पीएम मोदी ने कहा- निजी नुकसान

जावड़ेकर के अधीन रहते हुए पर्यावरण मंत्रालय ने हिमालय में बांधों के निर्माण का पक्ष लेना शुरू कर दिया था. सारा मामला तब बदला जब आर्ट ऑफ लिविंग ने मार्च 2016 में यमुना के नाजुक पारिस्थितिकी वाले तटीय क्षेत्र के एक लंबे-चौड़े हिस्से पर भारी-भरकम उत्सव मनाया. इसके लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पर्यावरण मंत्रालय की खूब खिंचाई की गई थी. इस उत्सव का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया गया था.

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नर्मदा पर बांध के ख़िलाफ़

दवे मध्य प्रदेश से होकर गुजरने वाली नर्मदा नदी पर एक वार्षिक समारोह का आयोजन कराते थे. इसे नर्मदा समग्र के नाम से जाना जाता है. उन्होंने एक नदी महोत्सव भी शुरू किया था.

नर्मदा पर एक पुस्तक के लेखक और कारवां के राजनीतिक संपादक हरतोष सिंह बल के मुताबिक दवे ने उन्हें आधिकारिक तौर पर एक बार बताया था कि वे नर्मदा पर बांध बनाने के पक्ष में नहीं हैं. 

इसी महीने दवे ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की प्रशासनिक अकादमी में आयोजित नदी, जल एवं पर्यावरण संरक्षण मंथन को संबोधित करते हुए कहा, "नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियान के कारण मध्य प्रदेश पूरे देश में नदी एवं जल संरक्षण की मिसाल पेश करेगा."

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'नर्मदा के अलावा जीवन में कुछ नहीं'

दवे ने कहा, "यदि पहाड़, जंगल, पर्यावरण को नहीं बचाया गया, तो एक दिन नर्मदा नदी क्रिकेट का मैदान बन जाएगी. नर्मदा के अलावा जीवन में कुछ नहीं है. हर छोटी नदी को जीवंत बनाने का अभियान चलना चाहिए. जो नदी प्यास बुझाती है, वही गंगा है. गांवों के पास बहने वाली नदियों, गांवों के तालाबों, पोखरों को बचाने की ज़रूरत है."

दवे ने इस दौरान कहा था, "नर्मदा नदी के कछार क्षेत्र को समृद्ध बनाने की जरूरत है. समाज बिना सरकारी मदद के भी यह काम आत्मप्रेरणा से कर सकता है. करीब एक लाख किलोमीटर कैचमेंट एरिया में जल स्रोतों को जीवन देने का काम आगे बढ़ाना होगा. नदियों और जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए प्राकृतिक खेती पर भी ध्यान देना होगा. यदि स्वास्थ्य बचाना है तो रसायन मुक्त खेती जरूरी है." 

ज़ाहिर है नर्मदा के इस नाविक का सपना अभी अधूरा है. उनकी असमय विदाई के बाद अब नए पर्यावरण मंत्री के सामने दवे की तरह पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर संजीदगी दिखाने की ज़रूरत है. यही दवे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

First published: 18 May 2017, 11:39 IST
 
सुधाकर सिंह @sudhakarsingh10

कैच हिंदी टीम, वो अमीर हैं निज़ाम-ए-जहां बनाते हैं, मैं फ़क़ीर हूं मिज़ाज-ए-जहां बदलता हूं...

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