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'मोदी रथ' में सवार होकर केंद्रीय मंत्री बनीं अनुप्रिया पटेल, अब कांग्रेस के साथ जाने को तैयार !

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 February 2019, 14:25 IST

2019 लोकसभा चुनाव से पहले पार्टियों ने अपना नफा-नुकसान देखना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में छोटी या क्षेत्रीय पार्टियां अपने फायदे के हिसाब से UPA या NDA के साथ गठबंधन कर रही हैं. कुछ ऐसी पार्टियां भी हैं जो पहले एक जीत के लिए तरसती थीं लेकिन साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी रथ पर सवार होकर लोकसभा पहुंची हैं. लेकिन अब वह एनडीए छोड़ यूपीए में शामिल होना चाहती हैं.

यूपी में अपना दल भी अब एनडीए छोड़कर यूपीए में जाना चाहती है. एक दिन पहले अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अनुप्रिया पटेल के पति आशीष पटेल ने कांग्रेस महासचिव और पूर्वी यूपी की प्रभारी प्रियंका गांधी तथा पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की है.

दरअसल, अपना दल आगामी लोकसभा सीट में एनडीए से यूपी की 80 सीटों में से 12 सीटें मांग रही थी लेकिन खबर है कि बीजेपी ने उसकी मांग मानने से इंकार कर दिया है. अनुप्रिया पटेल ने साफ कह दिया है कि अगर उनकी मांग मानी नहीं गई तो वह एनडीए छोड़ यूपीए में चली जाएंंगी. इससे पहले भी अपना दल ने बीजेपी को दो टूक कहा था कि वे अपने सहयोगियों के साथ व्यवहार सुधारें नहीं तो पार्टी कोई भी निर्णय ले सकती है.

अपना दल का गठन साल 1995 में अनुप्रिया पटेल के दिवंगत पिता सोनेलाल पटेल ने किया था. वह पूर्वी उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जाति में शुमार कुर्मियों के प्रभावशाली नेता माने जाते थे. कुर्मी जाति का पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में अच्छा खासा प्रभाव है. कुर्मी जाति के अलावा अपना दल का गैर-यादव, कुशवाहा, मौर्य, निषाद, पाल और सैनी वोटरों पर भी प्रभाव है.

साल 2007 के विधानसभा चुनावों में अपना दल को एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि पार्टी ने 403 में से 39 सीटों पर चुनाव लड़ा था. फिर साल 2009 के लोकसभा चुनाव में अपना दल ने 29 सीटों पर अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन तब भी पार्टी को एक भी सीट नसीब नहीं हुई थी. इसके बाद साल 2012 के विधानसभा चुनावों में भी अपना दल ने 76 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे सिर्फ एक सीट मिली. तब अनुप्रिया पटेल ने वाराणसी की रोहनिया सीट पर जीत दर्ज की थी. यह अपना दल की पहली जीत थी. यहां तक कि सोनेलाल पटेल भी कभी चुनाव नहीं जीत पाए थे.

इसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना दल ने दो लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. इस चुनाव में अपना दल एनडीए में शामिल थी. तब भारतीय जनता पार्टी ने भी मोदी लहर में यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी. समाजवादी पार्टी को 5 तथा कांग्रेस को दो सीटों पर जीत मिली थी. जबकि मायावती की बसपा को एक भी सीट नसीब नहीं हुई थी.

First published: 23 February 2019, 14:10 IST
 
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