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अरुण जेटली ने PM मोदी के दूसरे कार्यकाल से पहले पत्र लिखकर किया था ये अनुरोध

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 August 2019, 15:04 IST

पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का आज नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) निधन हो गया. जेटली 9 अगस्त को AIIMS में भर्ती हुए थे. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ नेता अरुण जेटली केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के पहले कार्यकाल में वित्त वित्त मंत्री थे. जेटली ने पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल में अनुरोध किया कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल न करें.

1973-1977: अरुण जेटली ने छात्र राजनीति में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्र नेता बने और 1974 में छात्र संघ के अध्यक्ष बने. आपातकाल के दौरान जेल भी गए. इस दौरान वह जय प्रकाश नारायण की भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में शामिल हुए. जेल से छूटने के बाद वह जनसंघ में शामिल हो गए.

1980: जेटली बीजेपी में शामिल हुए और उन्हें बीजेपी की युवा शाखा का अध्यक्ष और दिल्ली इकाई का सचिव बनाया गया.

1987-2009: भारत के सर्वोच्च न्यायालय और कई उच्च न्यायालयों के प्रैक्टिस के बाद 1989 में वी पी सिंह सरकार द्वारा उन्हें अडिशनल सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया. माधवराव सिंधिया, एल के आडवाणी और कई अन्य राजनेताओं के लिए उन्होंने केस लड़ा. राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने राजनीतिक कर्तव्यों को देखते हुए जून 2009 में कानून का अभ्यास बंद कर दिया.

1991-1999: 1991 से भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने. 1991 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया.

1999: 13 अक्टूबर 1999 वाजपेयी सरकार में उन्हें सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और विनिवेश राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया गया.

2000: जेटली को कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया. कानून, न्याय और कंपनी मामलों और जहाजरानी मंत्री नियुक्त किया गया.

2002-03: वह 1 जुलाई 2002 को बीजेपी के महासचिव नियुक्त हुए. 2003 में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने. 2004 के चुनावों में बीजेपी की हार के बाद कानूनी करियर में वापस आ गए.

2004-2014: 2009 में लालकृष्ण आडवाणी द्वारा उन्हें राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया. राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जन लोकपाल विधेयक पर अन्ना हजारे का समर्थन किया.

2014-2019: 2014 तक जेटली ने कभी कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ा था. उस वर्ष, वह अमृतसर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार थे, लेकिन कांग्रेस के अमरिंदर सिंह से हार गए. जेटली को नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वित्त मंत्री, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री और रक्षा मंत्री के रूप में चुना गया था. जेटली ने वित्त मंत्री रहने के दौरान मोदी सरकार के कई महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लेने में भूमिका निभाई जिनमे नोटबंदी और जीएसटी भी शमिल थे.

इस दौरान मोदी सरकार ने रेल बजट को आम बजट में मिला दिया, जिसमे जेटली ने अहम् रोल निभाया. यही नहीं आम बजट की तारीख को 1 फरवरी तक आगे बढ़ाने का फैसला भी जेटली ने वित्त मंत्री रहते लिया. जीएसटी कई टैक्स-स्लैब संशोधनों के तहत चला गया और जेटली ने कुशलतापूर्वक उनका उपयोग किया. इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड पेश करने में उनका अहम् रोल रहा.

29 मई 2019: 29 मई 2019 को प्रधान मंत्री मोदी को लिखे पत्र में अरुण जेटली ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मंत्रिमंडल में शामिल न करने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा नई सरकार के गठन में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाएंगे.

मोदी सरकार के संकटमोचक थे जेटली, अटल सरकार में भी निभाई अहम भूमिका

First published: 24 August 2019, 14:59 IST
 
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