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अरुणाचल प्रदेश: सीएम पेमा खांडू समेत 7 विधायक पार्टी से सस्पेंड

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 December 2016, 9:34 IST
(फाइल फोटो पीटीआई)

अरुणाचल प्रदेश में एक बार फिर सियासी संकट गहरा गया है. राज्य में सत्ताधारी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू समेत सात विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया है.

सीएम खांडू, डिप्टी सीएम चोवना मेन और पांच विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में गुरुवार को पीपीए की प्राथमिक सदस्यता से अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया गया.

इसके साथ ही पांच और विधायकों जेम्बी टाशी (लुमला), पासांग दोरजी सोना (मेचुका), चोव तेवा मेन (चोखाम), जिंगनू नामचोम (नामसाई) और कामलुंग मोसांग (मियाओ) पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई है.

'विधायक दल के नेता नहीं रहे खांडू'

पीपीए के अध्यक्ष काहफा बेंगिया ने एक आदेश में कहा, "पार्टी संविधान और 20 दिसंबर को कार्यकारी समिति की बैठक में पारित प्रस्ताव के तहत विधायकों को अस्थायी तौर पर प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है."

बेंगिया ने आगे कहा, "निलंबन के साथ ही मुख्यमंत्री पेमा खांडू अब पीपीए विधायक दल के नेता नहीं रहे." पार्टी अध्यक्ष ने विधायकों और पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खांडू की तरफ से बुलाई गई किसी बैठक में शामिल न हों. 

इस बीच अरुणाचल विधानसभा के स्पीकर टी नोरबू थोंगडोक को भेजे पत्र में पीपीए अध्यक्ष बेंगिया ने उनसे गुजारिश की है कि वह निलंबित विधायकों को सदन से असंबद्ध घोषित करें. इसके साथ ही बेंगिया ने विधानसभा में निलंबित विधायकों को अलग बैठने का इंतजाम करने की मांग की है. 

एक साल से सियासी उठापटक

गौरतलब है कि अरुणाचल में पिछले एक साल से राजनीतिक उठापटक चल रही है. राज्य में राष्ट्रपति शासन के बाद भाजपा के समर्थन से कांग्रेस के बागी कलिखो पुल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए थे. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन और स्पीकर के नोटिफिकेशन को असंवैधानिक करार दिया था.  

राज्य में कांग्रेस सरकार की बहाली के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नबाम तुकी ने दोबारा सत्ता संभाली थी. लेकिन शक्ति परीक्षण से पहले बागियों को साथ लाने के लिए पेमा खांडू को कांग्रेस ने विधायक दल का नेता चुना था.

सत्ता संभालने के थोड़े दिनों बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी को छोड़कर,कांग्रेस के 44 में से 43 विधायक भाजपा की सहयोगी पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में (पीपीए) में शामिल हो गए. 

हालांकि पीपीए में पहले से मौजूद और हाल ही में शामिल हुए नए सदस्यों में मतभेद जारी था. ताजा घटनाक्रम को इसी का नतीजा माना जा रहा है.

First published: 30 December 2016, 9:34 IST
 
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