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न मोदी-योगी न ही राहुल और ओवैसी हैं जीत की गारंटी, अब 'उल्लू' करेगा चुनावी बेड़ा पार!

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 December 2018, 17:12 IST

देश के पांच राज्यों में चुनावी दौर चल रहा है जिसमें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोजम में मतदान हो चुके हैं. जबकि राजस्थान और तेलंगाना में 07 दिसंबर को वोटिंग कराई जाएगी. चुनावी अखाड़े में उतरे उम्मीदवार किसी भी कीमत पर जीत दर्ज करना चाहते हैं. वोट पाने के लिए नेताओं के पास हथकंडों की कोई कमी नहीं हैं. सभी पार्टियों ने अपने-अपने स्टार प्रचारक को मैदान में लाया है.

बीजेपी के लिए मोदी-योगी तो कांग्रेस ने राहुल गांधी को उतारा है जबकि उनका मुकाबला करने के लिए ओवैसी बंधु भी अपने कटु शब्दों के धार को और तीखा कर रहे हैं इतने पर भी जीत पक्की न देख ''उल्लुओं" का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

एक तरफ वोटर को बरगलाने के लिए जाति, धर्म, जम्हूरीहत की दुहाई दी जाती है तो दूसरी तरफ नेताओं ने टोटके और तंत्र मन्त्र का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है. तेलंगाना के चुनावी समर में उल्लुओं की डिमांड काफी बढ़ गई है. कलबुर्गी जिले में पुलिस ने तेलंगाना की सीमा से सटे सेदाम तालुके से 6 लोगों को इंडियन ईगल आउल की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है.

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पूछताछ के दौरान तस्करों ने जब खुलासा किया तो कारण जानकर पुलिसवाले भी हैरान रह गए. तस्करों ने बताया कि पड़ोसी राज्य तेलंगाना में चुनाव लड़ रहे नेताओं ने रात में जगने वाले पक्षियों का ऑर्डर दिया था. दरअसल, नेता उल्लुओं की मदद से अपने विरोधी उम्मीदवारों के गुडलक को बैडलक में बदलना चाहते हैं और अपनी जीत पक्की करना चाहते हैं.

उल्लू जिताएगा चुनाव

अंधविश्वासी काला जादू के समय उल्लुओं को मार देते हैं और उनके सिर, पैर, पंख, आंखें विरोधी उम्मीदवारों के घर के सामने फेंक दिए जाते हैं ताकि वह वश में आ जाए या फिर चुनाव में हार हार जाए. सूत्रों का कहना है. ख़बरों की मानें तो विपक्षी पार्टियों के उम्मीदवार अक्सर ये तमाम चीजें इसलिए करते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि इससे उन्हें जीत हासिल होगी.

उल्लुओं के बारे में हमारे देश में मिथक है कि वे अपने साथ बुरी किस्मत लेकर आते हैं खासकर जब उल्लू घर में दाखिल हो जाए. इसका इस्तेमाल खासतौर पर तंत्र मन्त्र और काले जादू जैसे अन्धविश्वास से जुड़ी प्रथाओं के लिए किया जाता है.

चार लाख रुपये में एक उल्लू

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तस्करों ने प्रत्येक उल्लू की कीमत तीन से चार लाख रुपये लगाई थी. वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया, 'इंडियन ईगल आउल को कन्नड़ में कोम्बिना गूबे कहा जाता है और इसके पीछे एक अंधविश्वास यह भी जुड़ा हुआ है कि इनके जरिए लोगों को अपने वश में किया जा सकता है क्योंकि इनके पास बड़ी-बड़ी आंखें होती हैं, जो झपकती नहीं हैं.'

First published: 3 December 2018, 17:12 IST
 
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