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वाजपेयी और राजकुमारी कौल: कुंवारे राजनेता और शादीशुदा दोस्त की दास्तां

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 December 2016, 9:30 IST

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से एक बार सवाल पूछा गया था कि आप अब तक कुंवारे क्यों हैं? इसके जवाब में अपनी वाकपटु शैली में वाजपेयी ने पत्रकारों को लाजवाब करते हुए कहा था कि मैं अविवाहित हूं लेकिन कुंवारा नहीं हूं. 

वाजपेयी के इस बयान का मर्म चाहे जो भी निकाला जाए, लेकिन इस कुंवारे राजनेता की ज़िंदगी का एक हिस्सा ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से जुड़ा है. वो अतीत जिसका जिक्र दबे जुबान कभी-कभी हो जाता है. ढाई साल पहले (2 मई 2014 में) राजकुमारी कौल का निधन हो गया था.      

ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से दोस्ती

ग्वालियर अटल जी की जन्मभूमि है और राजकुमारी कौल का वाजपेयी से नाता उस वक्त से जुड़ा जब दोनों ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) में पढ़ते थे. 

इन दिनों कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक के साथ ही जनसंघ की राजनीति से भी जुड़े. वहीं कौल का परिवार शादी के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में सेटल हो गया. 

राजकुमारी कौल के पति बीएन कौल रामजस कॉलेज के दर्शन विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट बन गए. कौल का परिवार कैंपस में रहता था. कहते हैं कि इसी दौरान ग्वालियर की दोस्ती एक बार फिर परवान चढ़ी और वाजपेयी दोबारा कौल परिवार के संपर्क में आए. 

'रिश्ते पर सफाई देने की जरूरत नहीं'

वाजपेई ने कॉलेज के दिनों की अपनी दोस्त राजकुमारी कौल के साथ रिश्तों को लेकर कभी कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन उनकी शादी के बाद पति बीएन कौल के घर में वे काफी समय तक रहे थे.

एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में राजकुमारी कौल ने कहा था, "मैंने और अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी इस बात की ज़रूरत नहीं महसूस की कि इस रिश्ते के बारे में कोई सफ़ाई दी जाए.''

दत्तक पुत्री नमिता कौल के परिवार के साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल फोटो)

'ख़ूबसूरत कश्मीरी महिला'

कुछ अरसा पहले राजकुमारी कौल की दोस्त तलत ज़मीर ने एक साक्षात्कार में कहा, 'वो बहुत ही ख़ूबसूरत कश्मीरी महिला थीं. बहुत ही वज़ादार. बहुत ही मीठा बोलती थीं. उनकी इतनी साफ़ उर्दू ज़ुबान थी. मैं जब भी उनसे मिलने प्रधानमंत्री निवास जाती थी, तो देखती थी कि वहां सब लोग उन्हें माता जी कहा करते थे.'

तलत जमीर के मुताबिक वाजपेयी के खाने की सारी ज़िम्मेदारी उनकी थी. रसोइया आकर उनसे ही पूछता था कि खाने में क्या बनाया जाए. यही नहीं उनको टेलीविज़न देखने का बहुत शौक था. 

वाजपेयी के घर की 'सदस्य'

तलत जमीर ने इंटरव्यू में बताया था, "राजकुमारी कौल कहा करती थीं कि मशहूर गीतकार जावेद अख़्तर जब पैदा हुए थे, तो वो उन्हें देखने अस्पताल गई थीं क्योंकि जावेद के पिता जानिसार अख़्तर ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में उन्हें पढ़ाया करते थे. वो जावेद से लगातार संपर्क में भी रहती थीं.''

राजकुमारी कौल का अविवाहित अटल बिहारी वाजपेयी के घर से क्या नाता था, इस पर कुछ साफ-साफ नहीं निकलकर आया. हालांकि राजकुमारी कौल के निधन के बाद वाजपेयी के आवास से जो प्रेस रिलीज जारी की गई थी, उसमें उन्हें वाजपेयी के ‘घर का सदस्य’ संबोधित किया गया. 

राजकुमारी कौल, प्रधानमंत्री रहते हुए भी वाजपेयी के घर की सदस्य थीं. पीएम निवास निवास सात, रेसकोर्स रोड पर वे अपनी बेटी और अपने दामाद रंजन भट्टाचार्य के साथ रहती थीं. 

नमिता कौल वाजपेयी की दत्तक पुत्री

वाजपेयी ने उनकी बेटी नमिता कौल को गोद लिया हुआ था. इस दौरान वाजपेयी के साथ-साथ घर की देखभाल का जिम्मा उनके ही पास था. 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक तीन बार वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान कौल परिवार से ही वाजपेयी का घर संचालित था. इस बात को भाजपा-संघ परिवार से लेकर तत्कालीन विपक्ष यानी कांग्रेस सभी ने सहजता से स्वीकार किया.

अंतिम विदाई में सियासी जमघट

एनडीए की सरकार के दौर में बतौर वाजपेयी का घर में दूसरा नाम बापजी हुआ करता था. यह बात छिपी नहीं है कि बापजी की गोद ली हुई यानी राजकुमारी कौल की बेटी नमिता के पति रंजन भट्टाचार्य की तब तूती बोला करती थी. 

इन सबके बीच अटलजी के जीवन में राजकुमारी कौल की प्रासंगिकता पर भले ही ज्यादा कुछ बाहर निकलकर नहीं आया, लेकिन अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब 86 साल की उम्र में ढाई साल पहले उनका निधन हुआ, तो अंतिम विदाई देने के लिए बीजेपी से लेकर कांग्रेस के सभी बड़े नेता मौजूद थे.

उनके अंतिम संस्कार में लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और रवि शंकर प्रसाद के अलावा कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए. कुल मिलाकर अटल बिहारी वाजपेयी और राजकुमारी कौल का ये किस्सा एक कुंवारे राजनेता और शादीशुदा दोस्त की दास्तां जैसा है. इसे कोई भी नाम देने के लिए आप स्वतंत्र हैं.

First published: 25 December 2016, 9:30 IST
 
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