Home » राजनीति » Former PM Atal Bihari Vajpayee like to eat prawn and sweets as well as thandai
 

अटल बिहारी वाजपेयी की लजीज़ खाने से जुड़ी कुछ दिलचस्प कहानियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 December 2016, 8:06 IST
(ट्विटर)

क्या हार में क्या जीत में किंचित नहीं भयभीत मैं, कर्तव्य पथ पर जो भी मिला, यह भी सही, वह भी सही, वरदान नहीं मांगूंगा, हो कुछ पर हार नहीं मानूंगा. अटल बिहारी वाजपेयी की ओजस्वी कविता और भाषण शैली की मिसाल दी जाती है. 

वाकपटुता के साथ ही स्वाद को लेकर भी अटल बिहारी वाजपेयी काफी शौकीन रहे हैं. इस हरदिल अजीज राजनेता को पकवानों और लजीज खाने से खासा लगाव रहा है. ग्वालियर के बहादुरा के बूंदी के लड्डू हों या फिर दौलतगंज की मंगौड़ी. हर दुकान से उनकी गहरी यादें जुड़ी हुई हैं.

एक शिक्षक के परिवार में जन्मे अटल जी सियासत में लगातार ऊंची सीढ़ियां चढ़ते गए. लेकिन तमाम व्यस्तताओं के बाद भी उनके जुबां से ग्वालियर के पकवानों का स्वाद नहीं उतरा. 

झींगा मछली अटल जी को बेहद पसंद

नॉन वेजीटेरियन व्यंजनों में अटल जी को 'झींगा मछली' काफी पसंद है. अक्सर वे प्रॉन की डिश खाते थे. यही नहीं मदिरापान को लेकर भी कभी उन्होंने छुपाया नहीं. भांग के अटलजी शौकीन रहे हैं. उनके लिए उज्जैन से भांग आती थी. 

मिठाई भी अटल जी के पकवानों की मेन्यू लिस्ट में काफी ऊपर है. शायद यही वजह है कि ग्वालियर की गलियों में लड्डू के जायके जैसी उनकी शख्सियत इस कविता की तरह है, "धरती को बौने नहीं ऊंचे कद के इंसानों की ज़रूरत है, लेकिन इतने ऊंचे भी नहीं कि कहीं कोई दूब न जमे, कोई कांटा न चुभे...मेरे प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना...ग़ैरों को गले न लगा सकूं...ऐसी रुखाई कभी मत देना."

प्रधानमंत्री का ओहदा मिलने के बाद भी अटल बिहारी वाजपेयी के मुंह में ग्वालियर के हलवाई के लड्डू, जलेबी और कचौड़ी का जायका बरकरार रहा. होली पर ठंडई और दिवाली पर मिठाई के बिना अटल बिहारी वाजपेयी के खाने के शौक की चर्चा अधूरी है. 

फाइल फोटो

जब ठंडई के लिए तांगे से गए...

खासकर ठंडई से तो उनका लगाव जगजाहिर है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर याद करते हैं कि जब वो नेता प्रतिपक्ष थे तो इंदौर से उज्जैन कार से आए. उज्जैन में अटलजी कहने लगे कि गोपाल मंदिर ले चलो. 

गौर ने इस घटना का जिक्र करते हुए बताया, "अटल जी ने कहा तांगे में ले चलो कार में नहीं. कोई देख ना पाए. बंद तांगे होते हैं. कहने लगे भांग का घोंटा तीन गिलास ले आओ. दो गिलास मैं पीयूंगा और बादाम-किशमिश डाल दो. एक ग्लास तुम पीना. मस्त आदमी, बहुत बड़े दिल के आदमी. उनसे हंसी-मजाक कुछ भी कर सकते थे आप. इतना बड़ा आदमी आज हिन्दुस्तान में कोई नहीं है."

First published: 25 December 2016, 8:06 IST
 
अगली कहानी