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जब 'भारत रत्न वाजपेयी' को भारत ने किया सलाम, 10 बड़े बयान

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 December 2016, 8:01 IST

दो साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन यानी 25 दिसंबर 2014 को उन्हें भारत रत्न देने का एलान किया गया. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनके आवास पर जाकर देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान उन्हें दिया था.

राष्ट्रपति भवन की ओर से जैसे ही यह ऐलान हुआ, उनको एक के बाद एक बधाई संदेशों का सिलसिला चल पड़ा. उनके साथ ही पंडित मदन मोहन मालवीय को भी भारत रत्न देने का ऐलान हुआ था. एक नजर अटल बिहारी वाजपेयी को सम्मान मिलने के बाद दिए गए दस बड़े बयानों पर: 

10 बड़े नेताओं के बयान

नरेंद्र मोदी:

पंडित मदन मोहन मालवीय और श्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया जाना बेहद खुशी की बात है. महान विभूतियों को देश का सर्वोच्च सम्मान दिया जाना राष्ट्र के प्रति की गई इनकी सेवाओं को पूर्ण मान्यता प्रदान करना है. अटलजी हम सबके लिए बहुत विशेष अर्थ रखते हैं. एक मार्गदर्शक, प्रेरक और बड़ों के बीच बड़े. भारत में उनका योगदान अमूल्य है. 

लालकृष्ण आडवाणी:

मैं इस बात से काफी प्रसन्न हूं कि सरकार ने अटलजी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय किया है. 

सोनिया गांधी:

अटलजी को यह सम्मान उनके स्टेटसमैन, बुद्विमत्ता और राष्ट्र के प्रति उनके गहरा लगाव का प्रतीक है. अटलजी विशाल हृदय, विचार और सुवक्ता थे. उनका पूरा राजनीतिक जीवन हमारे लिए संदेश है. 

मुफ्ती मोहम्मद सईद:

केवल भारतीय राजनीति में योगदान के लिए ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक शांति पहल और जम्मू कश्मीर के चहुंमुखी विकास की पहल के लिए भी वाजपेयी देश का सर्वोच्च सम्मान पाने के हकदार हैं.

नीतीश कुमार:

अटलजी के देश के प्रति योगदान को हमेशा याद किया जायेगा. मैं उन्हें बधाई देता हूं. हम भी चाहते थे कि अटलजी को भारत रत्न मिले. यूपीए सरकार को उन्हें यह सम्मान देना चाहिए था. 

अमर्त्य सेन:

वह राजनेता हैं और मैं समझता हूं कि वह हर संभव तरीके से सम्मानित किए जाने के हकदार हैं. किसी को भी उनके मानवीय गुणों की प्रशंसा करने के लिए उनकी नीतियों से सहमत होने की जरूरत नहीं है. 

तरुण गोगोई:

वाजपेयीजी प्रधानमंत्री रहे और दूसरे दल से होने के बावजूद उन्होंने मेरी मदद की. मैं उनका व्यक्तिगत रूप से काफी आभारी हूं. 

डॉक्टर हर्षवर्धन:

अटलजी पहले ही हमारे लिए भारत रत्न रहे हैं. लोग उनसे प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं. 

शरद यादव:

अटलजी के साथ मैंने काफी समय काम किया और वह बीजेपी में होने के बाद भी भारत की गंगा जमुनी तहजीब का सम्मान करते थे. 

अरुण जेटली:

उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और दक्षिणपूर्वी एशिया में शांति के प्रति प्रतिबद्ध रहे.

First published: 25 December 2016, 8:01 IST
 
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