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बाबरी मामला: आडवाणी-जोशी के ख़िलाफ़ आए 'सुप्रीम' फ़ैसले की 5 अहम बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 April 2017, 20:20 IST
(फाइल फोटो)

बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के ख़िलाफ़ आपराधिक साजिश के तहत केस चलाने का आदेश दिया है. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसमें आडवाणी-जोशी समेत 13 नेताओं के खिलाफ आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 120 बी के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई थी. पांच आसान बिंदुओं के जरिए इस फैसले को समझते हैं:

फाइल फोटो

1. सीधे तौर पर 13 में से 12 आरोपियों के खिलाफ विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले में आपराधिक साजिश के तहत लखनऊ की स्पेशल कोर्ट में केस चलेगा. कल्याण सिंह को राजस्थान में राज्यपाल होने की वजह से छूूट मिलेगी. जबकि अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, रामचंद्र दास परमहंस और बाल ठाकरे समेत आठ आरोपियों के निधन की वजह से उनका नाम मुकदमे से बाहर है.

2. 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने को लेकर दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हुई थी. लिहाजा रायबरेली कोर्ट और लखनऊ कोर्ट में दो मामले चल रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी मामले रायबरेली की अदालत से लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चार हफ्ते के अंदर ट्रांसफर किए जाएं. अब लखनऊ की अदालत में ही बाबरी विध्वंस का मामला चलेगा.

भाजपा सांसद विनय कटियार का नाम भी 13 आरोपियों में शामिल है. (फाइल फोटो)

3. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सामान्य हालात में अदालती कार्यवाही बिना किसी रुकावट के चलेगी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लखनऊ की स्पेशल कोर्ट में दो साल के अंदर पूरे मामले की सुनवाई ख़त्म की जाए. कोर्ट ने कहा है कि मामले की रोजाना सुनवाई की जाए. सुनवाई के दौरान किसी भी जज का तबादला नहीं होगा.

4. आडवाणी, जोशी और उमा भारती के अलावा विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, सतीश प्रधान, चंपत राय बंसल, महंत नृत्य गोपाल दास, महंत धर्मदास और राम विलास वेदांती पर भी आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चलाया जाएगा. 

5. मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 153-ए (दो समुदायों के बीच घृणा फैलाना), 153-बी (राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए ख़तरा पैदा करना) और 505 (विद्रोह भड़काने की मंशा से अफवाह फैलाना और गलत बयान देना या शांति भंग करना) के तहत आरोप लगाए हैं. स्पेशल कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 120 बी (आपराधिक साजिश) के आरोप हटाने का आदेश दिया था, सीबीआई ने इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आपराधिक साजिश को भी अब चार्जशीट में जोड़ा जाएगा.

First published: 19 April 2017, 13:37 IST
 
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