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मोहन भागवत: नेताओं को मजबूरी में करनी पड़ती है जातिवादी राजनीति

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 January 2018, 11:57 IST

गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने केरल के पलक्कड़ में एक स्कूल में तिरंगा फहराया. यह स्कूल आरएसएस से ही जुड़ा हुआ है. इससे पहले 25 जनवरी को संघ प्रमुख ने राजनीति को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की.

भागवत ने कहा कि राजनेताओं को जातिगत राजनीति पर चलने के लिए मजबूर किया जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की माने तो भागवत ने कहा, ''राजनेताओं को राजनीति में जाति का सहारा लेने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ता है क्योकि यहां लोग जाति के आधार पर ही वोट डालते हैं.'' 

रिपोर्ट के अनुसार भागवत ने कहा कि ”समाज में जितनी नैतिक आचरण की आदत है, उतनी राजनीति में दिखाई देती है. उदाहरण के लिए जात-पात की राजनीति मुझे नहीं करना, ऐसा मैं सोचकर भी जाता हू्ं लेकिन समाज तो जात-पात पर वोट देता है, तो मुझे करना ही पड़ता है. मुझे वहां टिकना है, तभी मैं परिवर्तन लाऊंगा. तो समाज परिवर्तन से राजनीतिक व्यवस्था में परिवर्तन होता है, उल्टा नहीं होता.”  

भारत में रोगजार को लेकर भी मोहन भागवत ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा भारत में उत्पादन में अहम भूमिका निभा रहे लोगों को अच्छी शिक्षा और प्रशिक्षण देना चाहिए. भागवत ने यह भी माना कि ऑटोमेशन और तकनीक कारोबार में अहम् भूमिका निभाती है. 

उन्होने कहा ''मैं तकनीक और कारोबारियों के खिलाफ नहीं हूं, जिन्हें ऑटोमेशन और मशीनीकरण से कारोबार चलाना पड़ता है. लेकिन उन्हें उन कर्मचारियों के कल्याण के लिए सावधान रहना चाहिए जो कंपनी के साथ जुड़े होते हैं और उसे चलाते हैं.”

मोहन भागवत ने कहा ”कोई व्यापार ऐसा नहीं होना चाहिए जिसका मुनाफा सिर्फ मालिकों को पहुंचे, बल्कि उसका मुनाफा अन्य लोगों को भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा इससे ही रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

First published: 26 January 2018, 11:57 IST
 
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