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DNA से NDA तक: 4 साल बाद नमो-नीतीश साथ-साथ

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 August 2017, 17:41 IST

बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (युनाइटेड) अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होगी. इसका निर्णय शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री आवास, एक अणे मार्ग पर आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया. 

जद (यू) के एक नेता ने बताया कि इस विषय का प्रस्ताव पार्टी के वरिष्ठ नेता के. सी. त्यागी ने बैठक में दिया, जिसका सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से समर्थन किया. माना जा रहा है कि जल्द ही जेडीयू कोटे से केंद्र सरकार में दो मंत्री शामिल होंगे.

भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार बनाए जाने से नाराज पार्टी के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव भी वर्तमान अध्यक्ष नीतीश कुमार की बैठक के समानांतर अपने समर्थकों की पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में एक बैठक की है. जिसे 'जनअदालत' नाम दिया गया है. इस बैठक में सांसद शरद यादव सहित उनके समर्थक भी हिस्सा ले रहे हैं.

DNA से NDA तक 

2013 में नरेंद्र मोदी को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद जद (यू) और भाजपा अलग हो गए थे. इसके बाद फिर से नीतीश कुमार की पार्टी जद (यू) औपचारिक तौर पर राजग में शामिल होने जा रही है. 

भाजपा ने गोवा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नरेंद्र मोदी को प्रचार समिति का अध्यक्ष घोषित किया था. यहीं से एनडीए और नीतीश के बीच दरार चौड़ी हो गई थी. नीतीश ने एनडीए से अलग होने के साथ ही बिहार में जेडीयू-भाजपा गठबंधन की सरकार में से भाजपा कोटे के मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था.  

2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने. अकेले भाजपा ने 282 सीटों पर जीत हासिल की. चुनाव नतीजों के ठीक अगले दिन 17 मई 2014 को नीतीश कुमार ने बिहार के सीएम पद से इस्तीफा देते हुए जीतन राम मांझी को कमान सौंपी थी.

इसके बाद 2015 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नीतीश एक बार फिर कुर्सी पर काबिज हुए. चुनाव में जेडीयू-राजद और कांग्रेस के महागठबंधन ने एनडीए से मुकाबला किया. प्रचार अभियान के दौरान पीएम मोदी का डीएनए वाला बयान काफी चर्चित हुआ.

पीएम मोदी ने नीतीश के डीएनए में ख़राबी होने का आरोप लगाया. नीतीश ने इसे बिहार के स्वाभिमान से जोड़कर प्रशांत किशोेर की रणनीति पर चलते हुए पीएमओ तक नाखूनों के सैंपल भिजवाने का अभियान छेड़ दिया. विधानसभा चुनाव में डीएनए वाले बयान पर पीएम मोदी और नीतीश में जमकर तकरार देखने को मिली.

विधानसभा चुनाव में महागठबंधन ने एनडीए को करारी शिकस्त दी. 243 सदस्यों वाली विधानसभा में राजद को 80, जेडीयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें हासिल हुईं. इस तरह महागठबंधन ने 178 सीटें जीतते हुए एनडीए का सूपड़ा साफ कर दिया. भाजपा 53 और एनडीए 57 सीटों पर सिमट गया.

लेकिन 20 महीने में ही महागठबंधन टूट गया. तेजस्वी यादव के इस्तीफे के मुद्दे पर नीतीश ने महागठबंधन तोड़कर एक बार फिर भाजपा से दोस्ती कर ली. यानी डीएनए से शुरू हुआ विवाद अब नीतीश और उनकी पार्टी के एनडीए में शामिल होने के मोड़ पर पहुंच गया है.

First published: 19 August 2017, 16:04 IST
 
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