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नीतीश सरकार का फ्लोर टेस्ट, दोनों धड़ों में टूट रोकने की कोशिशें तेज़

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2017, 10:14 IST

गुरुवार को नीतीश कुमार ने छठी बार बिहार के सीएम के तौर पर शपथ ली. बुधवार को बिहार में 20 महीने पुराना महागठबंधन टूट गया था और नीतीश ने भाजपा के सहयोग से सरकार बना ली. राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने नीतीश को शुक्रवार को बहुमत साबित करने को कहा है. 

नीतीश कुमार दावा कर रहे हैं कि उनके पास एनडीए और जेडीयू समेत कुल 132 विधायकों का समर्थन है. लेकिन जेडीयू में बगावत के स्वर उठने के बाद टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. हालांकि बताया जा रहा है कि शरद यादव को संतुष्ट कर लिया गया है. 

बहुमत के लिए बिहार विधानसभा में नीतीश को 122 विधायकों का समर्थन चाहिए. सदन में कुल 243 विधायक हैं. इनमें राजद के 80 और कांग्रेस के 27 विधायक हैं. इसके अलावा भाजपा के 53, आरएलएसपी के दो, लोजपा के दो और हम के एक विधायक हैं. वहीं सीपीआई (एमएल) के तीन और चार निर्दलीय एमएलए हैं. 

दो साल पहले चुनाव लड़ते हुए जेडीयू ने 71 विधानसभा सीटें हासिल की थीं. इनमें से पांच मुस्लिम और 11 यादव विधायक ऐसे हैं, जो नीतीश से बग़ावत करके लालू के साथ जा सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेस के 18 विधायक जल्द ही एनडीए के खेमे में आ सकते हैं. बिहार में कांग्रेस के 27 विधायक हैं.

बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में भी बगावत के सुर उठने लगे हैं. राजद के गायघाट के विधायक महेश्वर यादव ने गठबंधन टूटने के लिए पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके पुत्र पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव को जिम्मेदार बताया है.

अब देखना ये होगा कि क्या ये नेता अपनी पार्टी में उठ रहे बगावत के सुर रोक पाएंगे या बिहार की राजनीति में अभी कुछ बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा.

First published: 28 July 2017, 10:13 IST
 
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