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बर्थडे स्पेशलः गांधी परिवार के 'चिराग' राहुल गांधी के बारे में क्या ये बातें जानते हैं आप

विकाश गौड़ | Updated on: 19 June 2018, 10:59 IST

किसी को अगर विरासत में कुछ मिले तो इसमें उसका कुछ योगदान नहीं होता. हालांकि, उस विरासत में उनके पूर्वज माता-पिता का योगदान जरूर होता है, जिन्होंने अपनी मेहनत से उसको (विरासत) बनाया है. भारत में बाप-दादा की विरासत पर उसके वारिस का हक होता है. यही हक राहुल गांधी को मिला है.

यूं तो राहुल गांधी को सोने की चम्मच से दूध पिलाने की बात कही जाती है, लेकिन इस बीच राहुल गांधी की अहम बातों को लोग भूल जाते हैं. भले ही वह अपने भाषण और बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि वह अभी राजनीति की एबीसी नहीं सीखे हैं.

एक बार को मान लिया जाए कि राहुल राजनीति की ए बी सी नहीं सीखे हैं लेकिन आप इस बात को कैसे नकार सकते हैं कि वो तीन बार के सांसद हैं. ऐसे में आप राहुल की विरासत को तो शायद नहीं कोस सकते. अगर राहुल गांधी में खोट है तो फिर यूपी के अमेठी की जनता क्या बेवकूफ है? जो उनके हर बार जिता देती है.

आपको ये भी बता दें कि पॉलिटिक्स राहुल गांधी की पहली च्वॉइस नहीं थी. क्योंकि उन्होंने जब साल 1995 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से एम फिल किया तो उन्होंने लंदन में एक मैनेजमेंट कंस्लटिंग फर्म के साथ तीन साल तक काम किया. जब वह भारत आए तो यहां भी मुंबई में उन्होंने अपनी एक कंपनी खेली थी.

साल 1970 में 19 जून को जन्में राहुल गांधी दादी इंदिरा गांधी, पिता राजीव गांधी और मां सोनिया गांधी के लाडले रहे हैं. राहुल गांधी, गांधी खानदान के बड़े बेटे तो हैं ही साथ ही वह सबके चहेते भी रहे हैं. फिलहाल वह अपनी दादी, पापा को खोने के बाद और मां की उम्र हो जाने के बाद राजनीति में सक्रीय हो गए हैं.

इसी वजह से मां सोनिया गांधी ने भी उनको कांग्रेस पार्टी की सत्ता यानी अध्यक्ष पद की कुर्सी सौंप दी है. हालांकि, उसके बाद भी कांग्रेस के दिन बहुरे नहीं लेकिन हाल ही में हुए कर्नाटक चुनाव में जरूर कांग्रेस गठबंधन के साथ सत्ता में आई है लेकिन उसके अलावा कहीं कोई किरण दिखाई नहीं पड़ती.

राहुल गांधी से जुड़ी कुछ मुख्य बातें-

आपको बता दें राहुल गांधी ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत दिल्ली के सैंट कोलंबस स्कूल से की थी. लेकिन साल 1981 में उनको देहरादून के दून पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के लिए भेज दिया गया था. उसके बाद साल 1989 में दिल्ली के सैंट स्टीफंस कॉलेज में राहुल गांधी ने अंडर ग्रेजुएट कोर्स के लिए एडमिशन लिया. लेकिन पहला साल पूरा करने के बाद ही राहुल गांधी को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जाना पड़ा

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साल 1991 में पिता राजीव गांधी की हत्या के बाद राहुल गांधी को फ्लोरिडा के रॉलिंग कॉलेज शिफ्ट किया गया. यहीं से साल 1994 में राहुल गांधी ने बीए की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई पूरी करने के बाद राहुल गांधी अपने वतन वापस आ गए. लेकिन इस बीच देश की राजनीति और हालात बहुत हद तक बदल चुके थे. यही कारण था कि राहुल गांधी को कांग्रेस ने राजनीतिक गलियारे में उतारा.

थोड़ा बहुत राजनीति में समझ होने के बाद साल 2004 में राहुल गांधी को कांग्रेस ने अपने गढ़ कहे जाने वाले अमेठी सीट से चुनाव लड़ाया और यहां राहुल को अपनी राजनीति की पहली जीत नसीब हुई और वह देश की संसद में पहली बार पहुंचे. इसके बाद समय के साथ-साथ राहुल ने मां सोनिया गांधी की देख रेख में पार्टी में कई अहम पदों पर काम किया.

जैसे-जैसे राहुल की राजनीतिक समझ आगे बढ़ रही थी वैसे-वैसे उनके ऊपर जिम्मेदारियां सौंपी जा रहीं थी. यही कारण था कि धीरे-धीरे राहुल गांधी ने अपनी विरासत यानी कांग्रेस पार्टी के भीतर खुद के लिए जगह बनाई और वह इसमें कामयाब हुए. साल 2013 में कांग्रेस ने राहुल गांधी को पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त किया. 13 साल तक भारतीय राजनीति में खुद को मथने के बाद राहुल गांधी को साल 2017 के आखिर में पार्टी का अध्यक्ष चुना गया.

First published: 19 June 2018, 10:58 IST
 
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