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दलित सांसदों के असंतोष से क्यों डर गई बीजेपी, अब पीएम मोदी खुद मनाएंगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 April 2018, 12:20 IST

साल 2019 के लोकसभा और आगामी कर्नाटक चुनाव को देखते हुए बीजेपी अपने नाराज दलित सांसदों को मनाने की कवायद में लग गई है. ख़बरों की माने तो पीएम मोदी खुद इन सांसदों से मिलकर इनको मनाने की कोशिश करेंगे. दलित सांसदों का नाराज होना पार्टी के लिए इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव नजदीक हैं. कर्नाटक में तो दलित वोटरों का आंकड़ा लगभग 19 फीसदी के आसपास है और यह सत्ता बनाने- बिगाड़ने में अहम रोल अदा करते हैं.

एससी-एसटी एक्ट को लेकर देशभर के दलित संगठनों ने भारत बंद का ऐलान किया था. जिसके दबाव में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक पुर्नविचार याचिका भी दायर की थी. बीजेपी के जो चार सांसद नाराज बताये जा रहे हैं उनमे सांसद उदित राज, यूपी से यशवंत सिंह, अशोक कुमार दोहरे और यूपी के ही सांसद छोटेलाल खरावत शामिल हैं.

उदित राज से पहले सांसद यशवंत सिंह ने अपनी ही सरकार को निशाने पर लिया. सांसद ने कहा सत्ता में चार साल पूरे होने के बावजूद सरकार ने लगभग 30 करोड़ दलितों के लिए कुछ नहीं किया. 2 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में उत्तर प्रदेश के बिजनौर के नगीना के सांसद यशवंत सिंह ने आरोप लगाया कि आश्वासन के बावजूद दलितों को अभी तक रोजगार और पदोन्नति सहित आरक्षण का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है.

जबकि इटावा के बीजेपी सांसद अशोक कुमार डोहरा ने भी प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा, जिसमे उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में दलितों को अपने घरों से बाहर खींच कर पीटा गय. उन्होंने राज्य पुलिस पर उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज करने का भी आरोप लगाया. पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने कहा, उनपर जातिवादी टिप्पणी की जा रही है.

2019 लोकसभा चुनावों पर प्रभाव

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बीजेपी और दलित सांसदों का असंतोष बीजेपी के लिए गंभीर नतीजे हो सकते है क्योंकि वे सभी यूपी से हैं, जिनके पास समुदाय की सबसे बड़ी आबादी और अधिकतम 80 लोकसभा सीटें हैं. समाजवादी पार्टी और बसपा के संभावित गठबंधन की चुनौती का सामना करने के बाद दलित सांसदों का असंतोष अगले साल लोकसभा चुनावों में भाजपा के लिए बड़ा झटका दे सकता है.

भाजपा और दलित समुदाय के भीतर बढ़ती अशांति के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने पार्टी के सांसदों को दलित वर्चस्व वाले गांवों में कम से कम दो दो रात बिताने और पार्टी में समुदाय की आस्था को पुनर्स्थापित करने के लिए कहा था. आंकड़ों की माने तो देश में 20,000 से अधिक ऐसे गांव हैं और ये चुनावों पर बड़ा असर डालते हैं.

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First published: 8 April 2018, 12:05 IST
 
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