Home » राजनीति » Budget 2018: Before the election of 2019, there are two challenges in front of Modi: Big Headache
 

बजट 2018 : 2019 से पहले मोदी के सामने हैं ये दो बड़े सिर दर्द

सुनील रावत | Updated on: 31 January 2018, 16:07 IST

केंद्रीय बजट 2018 ऐसे वक़्त में पेश किया जा रहा है जब जब भारतीय अर्थव्यवस्था आधे दशक बाद फिर से आर्थिक मंदी का ख़तरा झेल रही है. नोटबंदी और जीएसटी के कारण मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है. निवेश में गिरावट आने की संभावना बनी हुई है. सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण में भी निवेश बहुत आशावादी नहीं लग रहा है. इससे पता चलता है कि भारत के निवेश में मंदी लंबे समय तक रहने की संभावना है.

क्या है सिर दर्द

निवेश में मंदी का मतलब है कि नौकरियों की समस्या अभी भी जारी रह सकती है. 2019 के लोकसभा चुनावों के आगे यह सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द हो सकता है. वह भी तब जब 2014 के चुनावों में पीएम मोदी ने अधिक नौकरियों का वादा किया था.

 

सरकार के लिए दो अन्य सिरदर्द ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रेडिट ग्रोथ की गति और मंदी भी है. छोटे और मध्यम आकार की फर्मों के लिए क्रेडिट ग्रोथ में एक पिकअप महत्वपूर्ण है, जो बड़ी कंपनियों के मुकाबले पूरी तरह बैंकों पर अधिक निर्भर हैं. हालांकि बैंक रेकेपिटलाइज़ेशन से ऋण वृद्धि के मुद्दे को कम करने की उम्मीद है. लेकिन ग्रामीण संकट को ठीक करने के लिए अभी तक कोई बेहतरीन योजना नहीं दिखाई दे रही है.

सरकार  के लिए सबसे बड़ा जोखिम कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों में वृद्धि है, जो आगामी महीनों में और बढ़ने की संभावना है. पिछले कुछ सालों के पूरे राजकोषीय घाटे को कम करने ने तेल की कीमतों ने अहम रोल निभाया. डायरेक्ट्रोरेट जनरल ऑफ सिस्टम्स एंड डाटा मैनेजमेंट द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों की माने तो बीते आठ माह की अवधि में सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थो पर लगने वाले कर से 1,50,000 करोड़ रुपये की कमाई की है.

First published: 31 January 2018, 15:02 IST
 
अगली कहानी