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बजट 2018 : जीडीपी से लेकर महंगाई तक, एनडीए सरकार बेहतर या यूपीए

सुनील रावत | Updated on: 1 February 2018, 9:14 IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली गुरुवार को नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार की पहली अवधि का पांचवां और अंतिम बजट पेश करेंगे. अरुण जेटली एनडीए के ऐसे पहले वित्त मंत्री हैं जो सभी पांच केंद्रीय बजट पेश करंगे. पूर्व एनडीए सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की जगह 2002 में जसवंत सिंह को लाया गया था.
 
उस वक़्त एनडीए सरकार कम महंगाई के चलते संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यूपीए सरकार की तुलना में मुद्रास्फीति को अधिक कुशलता से नियंत्रित करने में सक्षम थी. हालांकि इससे विकास दर पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ा. 

2013-14 में यूपीए के समय आर्थिक विकास दर 6.4 प्रतिशत थी. अगर अग्रिम अनुमान सही हैं तो एनडीए सरकार ने इसे 2017-18 में 6.5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है. 2018-19 के लिए विकास दर का अनुमान 7 से 7.5 प्रतिशत है.

मोदी सरकार ने रोजगार के लिए स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रम चलाये लेकिन आज भी सबसे ज़्यादा रोजगार यूपीए द्वारा लागू किए गए मनरेगा में ही मिल रहा है. सरकार ने 2017-18 के बजट में मनरेगा के लिए आवंटन में 11 हजार करोड़ रुपये का इज़ाफ़ा करते हुए इसे 48 हजार करोड़ रुपए कर दिया.

जो इतिहास में सबसे ज्यादा थी. लोकसभा में सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार निर्माण कार्यक्रम के तहत 2016-17 में 4 लाख 8 हज़ार रोजगार के मौके बने, जबकि मनरेगा में 235 करोड़ रोजगार दिवस बने (यानी 235 करोड़ लोगों के लिए कम से कम एक दिन का रोज़गार पैदा किया.

First published: 1 February 2018, 9:09 IST
 
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