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'कैश सारा कर्नाटक चला गया'

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 April 2018, 18:29 IST

देश में कैश की कमी ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अचानक चुनावों से पहले कैश का सर्कुलेशन इतना क्यों बढ़ गया है. सरकार की ओर से कहा गया है कि देशभर में हर महीने 20 हजार करोड़ रुपये के नोटों की सामान्य मांग रहती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में कुछ इलाकों में नोटों की मांग बढ़ी है. इस महीने के 12-13 दिनों में ही 45 हजार करोड़ करंसी की खपत हो चुकी है.'

सबसे बड़ा सवाल यही है कि कहीं आगामी कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे राज्यों में होने वाले चुनावों से के कैश सर्कुलेशन तो नहीं बढ़ा है. इस बात में इसलिए भी दम दिखता है क्योंकि चुनाव आयोग के निगरानी दल और पुलिस अधिकारियों ने बीते दिनों कर्नाटक में 22 करोड़ से अधिक अवैध नकद जब्त किया.

यहां चुनाव आचार संहिता 27 मार्च को लागू किया गया था. चुनाव आयोग के दस्ते और पुलिस अधिकारियों ने अब तक 22.34 करोड़ रुपये से अधिक यहां नकद जब्त किया है. अब कई लोग सोशल मीडिया पर टिप्पणियां कर रहे हैं कि कैश सारा कर्नाटक जा चुका है.  

एक सवाल के जवाब में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग ने माना कि 2000 रुपये के नोटों में भारी कमी आई है. हालांकि उन्होंने काला धन जमा होने की आशंका को खारिज कर दिया. गर्ग ने बताया कि 'अभी सिस्टम में 2000 रुपये के 6 लाख 70 हजार करोड़ रुपये मूल्य के नोट हैं.

क अन्य रिपोर्ट के अनुसार भाजपा ने 2016-17 में चुनाव प्रचार में 606.74 करोड़ खर्च की गई खर्च की. इसकी तुलना में इस अवधि में कांग्रेस ने इसके लिए 149.65 करोड़ रुपये खर्च किए. इस अवधि में बीजेपी ने 10 में से पांच राज्यों में चुनाव जीते. असम, गोवा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मणिपुर पांच राज्यों में बीजेपी ने औसत चुनाव प्रचार के साथ 60.67 करोड़ रुपये का खर्च किया.

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दूसरी ओर चुनाव प्रचार पर कांग्रेस का औसत खर्च लगभग 15 करोड़ था और 2016-17 में उसने दो राज्यों के चुनावों में पुदुचेरी और पंजाब जीत दर्ज की. बीजेपी और कांग्रेस ने 2016-17 में प्रशासनिक खर्च पर 69.78 करोड़ रुपये और 115.65 करोड़ रुपये खर्च किए.

First published: 17 April 2018, 18:28 IST
 
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