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चिन्मयानन्द केस : SC का आदेश- उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए SIT का गठन हो

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 September 2019, 17:47 IST

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद चिन्मयानंद के खिलाफ एक लॉ स्टूडेंट द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए. हालांकि जस्टिस आर भानुमति और ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वे आरोपों सत्यता पर कोई राय नहीं व्यक्त नहीं कर रहे हैं.

अदालत ने कहा कि एसआईटी का नेतृत्व एक महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी द्वारा किया जाये और महिला द्वारा की गई शिकायतों को देखने के लिए पुलिस अधीक्षक रैंक का एक अधिकारी नियुक्त किया जाये. अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मामले में दर्ज दो FIR में जांच की निगरानी के लिए एक पीठ गठित करने का अनुरोध किया. 

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक शैक्षणिक संस्थान की तलाश करने के लिए भी कहा जहां महिला और उसके भाई को प्रवेश दिया जा सकता है क्योंकि वे इन परिस्थितियों में अध्ययन जारी रखने में सक्षम नहीं हो सकते हैं. वकीलों के एक समूह ने पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था कि इस मामले को मुकदमा चलाने के लिए कहा जाए. 23 वर्षीय लॉ छात्रा ने एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमे प्रभावशाली लोगों द्वारा कथित उत्पीड़न की बात कही गई थी.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 27 अगस्त को चिन्मयानंद को अपहरण के आरोप में बुक किया था. जबकि लापता छात्रा 30 अगस्त को राजस्थान में मिली थी. चिन्मयानंद के वकील ने उत्पीड़न के आरोपों का खंडन किया है और दावा करते हुए कि इसमें उन्हें फंसाने का प्रयास किया जा रहा है. भाजपा नेता तीन बार के लोकसभा सांसद हैं और अटल बिहारी वाजपेयी के प्रशासन में राज्य मंत्री भी थे.

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First published: 2 September 2019, 17:36 IST
 
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