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SC: शादी ख़त्म करने का सबसे घटिया तरीका है तीन तलाक़

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 May 2017, 16:24 IST

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने तीन तलाक की संवैधानिक वैधता के मुद्दे पर शुक्रवार को बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भले ही इस्लाम की विभिन्न विचारधाराओं में तीन तलाक को 'वैध' बताया गया हो. लेकिन तीन तलाक शादी खत्म करने का सबसे घटिया और अवांछनीय तरीका है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर की अगुआई में पांच सदस्यीय बेंच ने लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को तीन तलाक पर सुनवाई जारी रखी. मनमोहन सरकार में पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और सीनियर वकील सलमान खुर्शीद ने बेंच को कहा कि इस मुद्दे की न्यायिक समीक्षा की जरूरत नहीं है. खुर्शीद ने कोर्ट को यह भी बताया कि मुस्लिमों की होने वाली शादी के निकाहनामे में एक शर्त डालकर महिलाएं तीन तलाक को न भी कह सकती हैं.

दरअसल खुर्शीद इस मामले में कोर्ट के लिए अमीकस क्यूरी की भूमिका निभा रहे हैं. कोर्ट ने खुर्शीद से उन इस्लामिक और गैर इस्लामिक देशों की सूची देने के लिए कहा, जहां तीन तलाक़ पर बैन लगाया गया है. इसके बाद खुर्शीद ने बेंच को बताया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मोरक्को, सऊदी अरब जैसे देश शादी खत्म करने के तरीके के तौर पर तीन तलाक को मान्यता नहीं देते हैं.

वहीं तीन तलाक पीड़ितों में से एक की ओर से अदालत में पेश सीनियर वकील राम जेठमलानी ने तीन बार तलाक को 'घृणित' बताते हुए कहा कि यह महिलाओं को तलाक का समान अधिकार नहीं देता. कोर्ट ने कहा, "तीन तलाक का अधिकार सिर्फ पुरुषों के पास है, महिलाओं को नहीं. यह संविधान के बराबरी के अधिकार से जुड़े आर्टिकल 14 का उल्लंघन है."

जेठमलानी ने कहा, "तीन तलाक लिंग के आधार पर मतभेद करता है और पवित्र कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ है. इसके पक्ष में कितनी भी दलीलें दी जाएं, लेकिन इस पाप से भरी घिनौनी प्रथा का बचाव नहीं किया जा सकता है."

First published: 12 May 2017, 16:24 IST
 
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