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कांग्रेस का आरोप, जज लोया मामले में बताया RSS का हाथ

न्यूज एजेंसी | Updated on: 27 April 2018, 9:13 IST

कांग्रेस ने गुरुवार को जस्टिस बी.एच. लोया की मौत के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर अमित शाह को बचाने के लिए 'प्रेरित जनहित याचिका' दायर करने का आरोप लगाया है. आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने कहा कि इसे RSS नेता भैयाजी जोशी के 'निर्देशों' पर BJP कार्यकर्ता सूरज लोलागे ने दायर किया. जोशी ने लोलागे को इसे सर्वोच्च न्यायालय से वापस नहीं लेने का भी निर्देश दिया था. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह सब जज लोया की मौत के मामले को बंद करवाने के लिए प्रायोजित तरीके से किया गया.

उन्होंने यह भी कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पिछले हफ्ते इस संबंध में SIT जांच की मांग को खारिज किए जाने के आदेश के दौरान यह कहे जाने से भी सहमत हैं कि एक जनहित याचिका का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग हो सकता है और वही हुआ भी.

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम सर्वोच्च न्यायालय से सहमत हैं कि इस तरह की कई जनहित याचिकाएं पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इच्छित फल की प्राप्ति के लिए दाखिल की जाती हैं." सिब्बल ने कहा कि सूर्यकांत लोलागे उर्फ सूरज लोलागे ने पिछले वर्ष कारवां पत्रिका की रिपोर्ट के आधार पर 27 नवंबर को बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष पहली जनहित याचिका दायर की थी.

कांग्रेस नेता ने कहा कि लोलागे इस वर्ष जनवरी में वकील व सामाजिक कार्यकर्ता सतीश उके के साथ कांग्रेस के संवाददाता सम्मेलन में शामिल हुए थे, जहां पार्टी ने दिसंबर 2014 में न्यायाधीश लोया की संदिग्ध परिस्थिति में मौत की जांच SIT से करवाने की मांग की थी. सिब्बल ने कहा कि पार्टी को उस वक्त लोलागे की पृष्ठभूमि और भाजपा व RSS से उसकी निकटता के बारे में पता नहीं था.

उन्होंने कहा, "हमें बाद में पता चला कि सूरज लोलागे को भैयाजी जोशी ने जनहित याचिका दायर करने और सर्वोच्च न्यायालय से इसे वापस न लेने का निर्देश दिया था. उनका आशय सूरज लोलागे और सतीश उके के भाई प्रदीप उके की फरवरी, 2018 में हुई बातचीत से स्पष्ट हो जाता है."

गौरतलब है कि जज लोया की बहन ने कहा था कि उनके भाई की मौत की खबर और उनका सामान लेकर आरएसएस का एक कार्यकर्ता उनके घर गया था, तभी उन्हें संदेह हो गया था कि 44 वर्षीय जज लोया की स्वाभाविक मौत नहीं हुई है. उनके परिवार को पहले से फोन पर धमकियां दी जा रही थीं.

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कुछ दिनों पहले जज लोया के बेटे का मीडिया के सामने आकर अचानक यह कहना कि वह अपने पिता की मौत की जांच नहीं करवाना चाहता और उधर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जांच की मांग वाली याचिका खारिज हो जाना संदेह उत्पन्न करता है. रंजन गोगोई सहित चार न्यायाधीशों ने इस ओर इशारा किया था कि मामले को रफा-दफा करने का उपाय लगाया जा रहा है. बेहतर यह होता कि जांच का आदेश दे दिया जाता तो जांच के बाद अमित शाह की बेगुनाही साबित हो जाती और पीड़ित परिवार को भी तसल्ली हो जाती.

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First published: 27 April 2018, 9:13 IST
 
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