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चुनाव आयोग ने सरकार से कहा- बैंकों में स्याही लगाकर न बदले जाएं पुराने नोट

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 November 2016, 11:11 IST

नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार ने लोगों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए कई कदम उठाए हैं. इनमें से एक हैं बैंकों में पुराने नोट बदलने के लिए लाइन में लगने वाले लोगों की उंगली में अमिट स्याही का इस्तेमाल.

चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार के इस कदम पर अब एतराज जताया है. चुनाव आयोग ने बाकायदा वित्त मंत्रालय को खत लिखकर कहा है कि बैंकों के काउंटर पर पुराने नोट बदलने के लिए अमिट स्याही का इस्तेमाल न किया जाए.

उपचुनाव को बताया वजह

इससे पहले केंद्र सरकार ने कतार में एक ही लोगों के कई जगह पैसे बदलने के लिए लाइन में लगने का हवाला देते हुए नोट बदलने के लिए आने वाले लोगों की उंगली में अमिट स्याही लगाने का फैसला किया था.

इस फैसले के बाद कुछ बड़े शहरों में 15 अक्तूबर से ही स्याही लगाने का काम शुरू हो गया था. वहीं ज्यादातर जगहों पर बैंकों में 16 नवंबर से लोगों की उंगली पर अमिट स्याही लगाई जा रही है.

पढ़ें: वोट की तरह पुराने नोट बदलने के लिए लगेगी अमिट स्याही

दरअसल चुनाव आयोग ने सरकार के फैसले पर इस वजह से चिंता जाहिर की है, क्योंकि कई जगहों पर उपचुनाव होने हैं. चुनाव आयोग ने वित्त मंत्रालय से कहा है कि जो लोग वोट कर चुके होते हैं, उनकी पहचान करने का यह आसान तरीका है. ऐसे में सरकार के इस कदम से वोटिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.

'काला धन बदलने वालों पर अंकुश के लिए कदम'

शक्तिकांत दास ने 15 अक्तूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, "हम इस बात का अध्ययन कर रहे थे कि बैंकों में इतनी लंबी कतार लगने की आखिर वजह क्या है. हमें ऐसी रिपोर्ट भी मिली कि कई लोगों ने काले धन को सफेद बनाने के लिए एक संगठित समूह बनाया है. उन्हीं लोगों को पुराने नोट बदलने के लिए भेजा जा रहा है." 

आर्थिक सचिव शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा था, "बैंक और एटीएम में लोगों की लंबी कतार लगने की एक वजह यह पता चली है कि एक ही लोग कई बार अलग-अलग जगहों पर नोट बदलने के लिए पहुंच रहे हैं." 

ममता ने भी किया था विरोध

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ विरोध का झंडा बुलंद कर रही हैं. गुरुवार को दिल्ली के आजादपुर में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ रैली में वह शामिल हुई थीं.  

ममता ने इस दौरान फैसले पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया था. खास बात यह है कि बंगाल में भी 19 नवंबर को विधानसभा के उपचुनाव हैं.

ममता बनर्जी ने उंगली में स्याही लगाने के फैसले का विरोध करते हुए कहा था, "बंगाल में 19 नवंबर को विधानसभा चुनाव है. संभावित मतदाता की उंगली पर अमिट स्याही लगाने का फैसला हुआ है. चुनाव आयोग का इस बारे में क्या कहना है?"

First published: 18 November 2016, 11:11 IST
 
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