Home » राजनीति » Delhi: Atal Bihari Vajpayee condition is in critical stage he is on life support system in AIIMS
 

अटल बिहारी वाजपेयी एक बार दे चुके हैं मौत को मात !

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 August 2018, 10:52 IST

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एम्स में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. उनकी तबीयत को लेकर लगातार बेचैनी बढ़ती जा रही है. पिछले 36 घंटों से उनकी सेहत में लगातार गिरावट जारी है. पिछले करीब 2 महीनों से AIIMS में भर्ती अटल जी की तबीयत बेहद नाजुक है. फिलहाल उन्हें फुल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है. 

बता दें कि इससे पहले भी एक बार वह मौत को मात देकर बाहर निकले थे. साल 1988 में वाजपेयी किडनी का इलाज कराने अमेरिका गए थे तब महान कवि धर्मवीर भारती को लिखे एक खत में उन्होंने मौत की आंखों में देखकर उसे हराने के जज्बे को कविता के रूप में उकेरा था.

धर्मवीर भारती को लिखे खत में उन्होंने बताया था कि डॉक्टरों ने उन्हें सर्जरी की सलाह दी है. तब से वह सो नहीं पा रहे थे. उन्होंने लिखा था कि उनके मन में चल रही उथल-पुथल ने इस कविता को जन्म दिया था.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका में अटल जी को इलाज के लिए भेजने के पीछे एक बड़ा योगदान तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी का था. तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संयुक्त राष्ट्र को भेजे डेलिगेशन में अटल का नाम शामिल किया था. उसका कारण यह था कि इसी बहाने अटल जी अपना इलाज अमेरिका में करा सकें. अटल जी ने भी कई बार इस बात के लिए राजीव गांधी की सराहना की थी. वह कहते थे कि राजीव की वजह से ही वह जिंदा हैं.

आप भी पढ़ें वह कविता जो अटल जी ने धर्मवीर भारती को लिखी थी- 

ठन गई! 
मौत से ठन गई! 

जूझने का मेरा इरादा न था, 
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, 

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, 
यूं लगा जिंदगी से बड़ी हो गई। 

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, 
जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं। 

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, 
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? 

तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ, 
सामने वार कर फिर मुझे आजमा। 

मौत से बेखबर, जिंदगी का सफ़र, 
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर। 

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं, 
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं। 

प्यार इतना परायों से मुझको मिला, 
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला। 

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए, 
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए। 

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है, 
नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है। 

पार पाने का क़ायम मगर हौसला, 
देख तेवर तूफ़ां का, तेवरी तन गई। 

मौत से ठन गई। 

First published: 16 August 2018, 10:49 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी