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दिल्ली: AAP का क्या होगा जनाब-ए-आली, वोटर ने की झोली ख़ाली

सुधाकर सिंह | Updated on: 13 April 2017, 13:34 IST
(फाइल फोटो)

दिल्ली में 23 अप्रैल को एमसीडी चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल को करारा झटका लगा है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है और प्रचंड बहुमत के साथ दो साल पहले सत्ता में आने वाली आम आदमी पार्टी के लिए ये नतीजे किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं.

विधानसभा चुनाव में 67 सीटों के साथ सत्ता में आने वाली आप ने राजौरी गार्डन सीट पर भी जीत हासिल की थी. पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंककर चर्चा में आए पूर्व पत्रकार जरनैल सिंह ने यहां से चुनाव जीता था, लेकिन पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए जरनैल सिंह ने इस सीट से इस्तीफ़ा दे दिया था. 

जरनैल की जगह हरजीत सिंह को टिकट

जरनैल सिंह की बदकिस्मती ये रही कि पहले तो लंबी में वे प्रकाश सिंह बादल से चुनाव हार गए और फिर आप ने इस बार उन पर भरोसा न जताते हुए हरजीत सिंह को टिकट दे दिया. नतीजे आने के बाद दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने ये कहकर बचाव किया कि शायद ग़लत उम्मीदवार चुनने की वजह से जनता ने उन्हें नकार दिया.

एमसीडी चुनाव की वोटिंग से ठीक दस दिन पहले आए इस उपचुनाव के नतीजे ने आप के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. हालांकि पार्टी अभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाने में बिजी है, लेकिन नतीजों का आकलन करें, तो साफ़ है कि आम आदमी पार्टी का वोट प्रतिशत रिकॉर्ड स्तर तक गिरा है.

फाइल फोटो

आप को मिले महज 13 फीसदी वोट

इस बार राजौरी गार्डन के उपचुनाव में महज 44 फीसदी वोट ही पड़े. जबकि पिछली बार 72.36 फीसदी मतदान हुआ था. कुल 78 हजार से ज्यादा वैध मतों में से बीजेपी-अकाली उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा को 40602 वोट हासिल हुए. वहीं दूसरे नंबर पर रहीं कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी चंदेला को 25950 वोट हासिल हुए. जबकि आम आदमी पार्टी के हरजीत सिंह महज 10243 वोट पाकर अपनी जमानत जब्त करा बैठे. 

जमानत बचाने के लिए उन्हें 13 हजार से ज्यादा वोट (कुल वैध वोटों का छठवां हिस्सा) हासिल करने पड़ते. बीजेपी-अकाली उम्मीदवार ने इस तरह 14652 वोटों से बड़ी जीत हासिल की. अब ज़रा तीनों उम्मीदवारों मत प्रतिशत को देख लीजिए:

बीजेपी-अकाली गठजोड़- 52 फीसदी
कांग्रेस- 33 फीसदी
आप- 13 फीसदी  

जब इस बार आप को मिले वोटों की 2015 विधानसभा चुनाव से तुलना करते हैं, तो साफ़ है कि अरविंद केजरीवाल की झोली इस बार जनता ने खाली कर दी है. चुनाव आयोग से मिले आंकड़ों के मुताबिक पिछली बार कुल 1,17,971 वोट डाले गए थे. इसमें से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जरनैल सिंह को 54916 वोट (46.55 फीसदी) हासिल हुए थे. 

बीजेपी-अकाली गठजोड़ ने पिछली बार भी मनजिंदर सिंह सिरसा को ही उतारा था. उन्हें 44880 वोट (38.04 फीसदी) मिले थे. कांग्रेस पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर थी. पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी चंदेला को कुल वैध वोटों में से 14167 (12.01 फीसदी) वोट ही हासिल हुए थे. 

 

भारत निर्वाचन आयोग

एमसीडी चुनाव की चुनौती

ज़ाहिर है आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती पहले से कहीं ज्यादा बड़ी है. दिल्ली में इसी महीने 23 अप्रैल को एमसीडी के चुनाव का मतदान होने जा रहा है. उससे पहले आप का तीसरे नंबर पर जाना अरविंद केजरीवाल के लिए बड़ा झटका है. 

अभी दिल्ली के तीनों नगर निगमों उत्तरी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में बीजेपी का शासन है. उत्तरी और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में पार्षदों की 104-104 सीटें हैं, जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में पार्षदों की 64 सीटें हैं. तीनों नगर निगमों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित हैं. 

पिछले साल हुए एमसीडी के उपचुनाव को छोड़ दें तो आम आदमी पार्टी पहली बार पूरी ताकत से एमसीडी चुनाव में उतर रही है. उसे यहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों की चुनौती से पार पाना है. बीजेपी ने जहां नया दांव खेलते हुए पिछले सभी पार्षदों को इस बार टिकट नहीं दिया है, वहीं मनोज तिवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल और बिहार के वोटरों को भी लुभाने की कोशिश की है. ऐसे में 25 अप्रैल को आने वाले एमसीडी चुनाव के नतीजे दिल्ली में भविष्य की सियासत और आप के भविष्य के बारे में भी काफ़ी कुछ तय करेंगे.

23 अप्रैल को दिल्ली में तीन नगर निगमों के 272 वार्डों में मतदान होना है. (फाइल फोटो)
First published: 13 April 2017, 13:34 IST
 
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