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राजनीतिक दलों को राहत: पुराने नोट जमा करने पर शर्तों के साथ टैक्स छूट

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:37 IST

नोटबंदी के बाद पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने नोट अब केवल बैंकों में जमा किए जा सकते हैं. इस बीच केंद्र सरकार ने राजनीतिक दलों को बड़ी राहत देते हुए कहा है कि पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट खाते में जमा करने पर उन्हें टैक्स से छूट दी जाएगी.

दरअसल मोदी सरकार ने विमुद्रीकरण के बाद एलान किया है कि अगर ढाई लाख रुपये से ज्यादा कोई व्यक्ति अपने खाते में 500 और 1000 रुपये के नोट जमा करता है, तो उसकी जांच हो सकती है. यही नहीं आयकर कानून के तहत जुर्माना और टैक्स भी भरना पड़ेगा.

आयकर कानून में छूट से छेड़छाड़ नहीं

हालांकि राजनीतिक पार्टियां ऐसी बंदिश से नहीं बंधी रहेंगी और वे बिना कोई टैक्स भरे पुराने नोट बिनी किसी सीमा के जमा कर सकती हैं. सियासी पार्टियों को आयकर कानून के तहत पहले से ही छूट मिली हुई है.

केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अधिया का कहना है, "सरकार राजनीतिक दलों को प्राप्त कर छूट में कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही है. कोई भी राजनीतिक दल 500 और 1,000 रुपये के नोट अपने खातों में जमा कराने के लिये मुक्त है." 

20 हजार से कम हो व्यक्तिगत चंदा

हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि यह भी देखा जाएगा कि राजनीतिक दलों को मिलने वाला व्यक्तिगत चंदा 20000 रुपये से कम होना चाहिए और यह दस्तावेजों में दर्ज भी होना चाहिए.

राजस्व सचिव ने कहा, "इस प्रकार की जमा पर शर्त होगी कि इसमें नकद में लिया गया व्यक्तिगत चंदा 20 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए और इसके पूरे दस्तावेज होने चाहिए जिसमें दानदाता की पूरी पहचान होनी चाहिए."

राजस्व सचिव ने कहा,"अगर कोई एक व्यक्ति 20000 रुपये से ज्यादा का दान पार्टी को देता है तो मौजूदा कानून के तहत वह चेक अथवा बैंक ड्राफ्ट के जरिये होना चाहिए."

इसके साथ ही सरकार ने कहा है, "किसानों की कृषि आय कर मुक्त है, हालांकि, इस मामले में किसानों को एक घोषणा पत्र देना होगा जिसमें यह कहना होगा कि उनकी सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है. ऐसी घोषणा से उन्हें बैंक जमा के लिए पैन की आवश्यकता नहीं होगी."

राजनीतिक चंदे में काला धन!

दरअसल चुनाव आयोग को सौंपी जानकारी के मुताबिक ज्यादातर पार्टियों के पास कैश चंदे में बढ़ोतरी हुई है. 8 नवंबर से नोटबंदी के बावजूद राजनीतिक दल अभी कैश में ही चंदा ले रहे हैं.

ऐसे में इन पुराने नोटों को चंदे में दिए जाने की पूरी उम्मीद है. ऐसे में अप्रत्यक्ष तरीके से पार्टियों के पास पुराने नोटों की सूरत में ब्लैक मनी पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. बैंक में जमा कराने पर उनसे कोई पूछताछ भी नहीं होगी.

गौरतलब है कि ज्यादातर राजनीतिक दल सूचना अधिकार के दायरे में आने को तैयार नहीं हैं और न ही नगद चंदे का स्त्रोत बताना चाहते हैं. सभी राजनीतिक पार्टियां कोर्ट से भी अपनी अज्ञात आय पर किसी तरह का आयकर देने से इनकार कर चुकी हैं. आयकर कानून के तहत उन्हें यह हक भी हासिल है.

First published: 17 December 2016, 11:42 IST
 
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