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कर्नाटक: राहुल के इस 'शेर' के आगे भाजपा के चाणक्य भी हो गए फेल

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 May 2018, 16:56 IST

साल 2014 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जोडी़ ने एक के बाद एक जीत का सिलसिला बना दिया था. लेकिन आखिरकार कर्नाटक चुनाव में जीत के साथ कांग्रेस ने इस जादुई तिलिस्म को तोड़ दिया. बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह के बारे में यह भी कहा जाता है कि शाह की रणनीति किसी न किसी तरह से बीजेपी को सत्ता में ले ही आएगी. लेकिन इस बार कांग्रेस के चाणक्य के सामने बीजेपी के चाणक्य की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई.

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किसी ने शायद ही सोचा होगा कि महज दो सीट जीत कर मेघालय में सरकार बनाने वाली बीजेपी कर्नाटक में बहुमत के करीब रहकर भी सरकार बनाने से चूक जाएगी. हालांकि इस बार भी कर्नाटक में बीजेपी सरकार बनानेे को लेकर अश्वस्त थी. लेकिन कांग्रेस के समय से पहले सचेत होना, येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए ज्यादा समय न देना और कांग्रेस के डीके शिवकुमार की व्यूहरचना ने भाजपा की हर योजना धराशाई कर दी, वो भी तब जब पार्टी बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब थी.

इस बार डीके शिवकुमार ने अपने दांव-पेंच और चाणक्य नीति से ऐसा बंदोबस्त किया कि, बहुमत न होने के बाद भी आनन-फानन में सरकार बनाने वाली बीजेपी को सत्ता छोड़नी पड़ी और सीएम की कुर्सी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के लिए खाली करनी पड़ी. डी. के. शिवकुमार ही वह कांग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने अपने सभी विधायकों को बीजेपी की सेंधमारी से बचाए रखा और एक भी विधायक को टूटने नहीं दिया.

जब बीजेपी बहुमत के आंकड़े को छूने के लिए एक-एक विधायक की जुगत में थी, तब कांग्रेस के लिए संकटमोचक की भूमिका में डी. के शिवकुमार ने पार्टी की नैया को संभाले रखा और बीच मझधार में डूबने से बचाया. इससे पहले भी गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान शिवकुमार ने कांग्रेस विधायकों को भाजपा के संपर्क से बचाने की रणनीति का जिम्मा संभाला था. इस दौरान भी उन्होंने विधायकों के रुकने से लेकर सुरक्षा के हर जरुरी इंतजाम किए थे.

एेसे में भले ही येदियुरप्पा बहुमत साबित करने में नाकाम रहें हो, मगर सोमवार को शपथ लेने वाली कुमारस्वामी सरकार की राह भी आसान नहीं होगी. उनके सामने मामूली बहुमत वाली संभावित सरकार के विधायकों को साधे रखने की बड़ी चुनौती होगी. साथ ही भाजपा की निगाहें कांग्रेस-जेडीएस से जीते 31 लिंगायत विधायकों पर है. ऐसे में थोड़ा सा भी असंतोष भावी सरकार की बलि ले सकता है.

First published: 20 May 2018, 16:56 IST
 
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