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नागरिकता कानून के विरोध में प्रख्यात उर्दू लेखक लौटाएंगे पद्मश्री पुरस्कार

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 December 2019, 15:10 IST

CAA: प्रख्यात उर्दू लेखक मुजतबा हुसैन ने कहा है कि वह नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में अपना पद्मश्री पुरस्कार लौटाएंगे. हैदराबाद में हुसैन ने कहा कि देश में वर्तमान माहौल को देखते हुए वह पुरस्कार नहीं रखना चाहते. प्रसिद्ध हास्य और व्यंग्यकार लेखक हुसैन को 2007 में पद्म श्री पुरस्कार मिला था. वह क्रांतिकारी कवि मखदूम मोहिउद्दीन के समकालीन माने जाते हैं, जो तेलंगाना सशस्त्र संघर्ष के दौरान भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे.

एक रिपोर्ट के अनुसार हुसैन ने कहा “मैंने पुरस्कार लौटाने का फैसला किया है, क्योंकि मैं इसे अपने घर में नहीं रखना चाहता. मैं जल्द ही इस बारे में बताते हुए एक पत्र (केंद्र को) लिखूंगा. हुसैन को उर्दू साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.

 

86 वर्षीय लेखक ने कई किताबें लिखी हैं. उनका लेखन विभिन्न राज्यों में उर्दू पाठ पुस्तकों का हिस्सा है. उनके लेखन को अन्य भाषाओं में भी अनुवादित किया गया है. इससे पहले दो अन्य उर्दू लेखकों शिरीन दलवी और यकूब यावर ने भी महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश राज्य सरकारों से प्राप्त अपने संबंधित पुरस्कारों को वापस करने के अपने फैसले की घोषणा की थी.

इस महीने की शुरुआत में कानून लागू होने के बाद हैदराबाद में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कैंपस भर के छात्र विरोध कर रहे हैं, वह इस कानून के रोल बैक की मांग कर रहे हैं. विशेष रूप से मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के छात्र 15 दिसंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने अपनी सेमेस्टर परीक्षाओं का बहिष्कार किया है, जिसे स्थगित कर दिया गया है.

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First published: 18 December 2019, 15:04 IST
 
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